11 Trial David Headley Deposes Before Mumbai Court Via Video Conference

1-‘दाऊद से बन गया डेविड हेडली’

मैंने 2006 में अपना नाम दाऊद गिलानी से बदलकर डेविड हेडली रख लिया था, ताकि भारत में प्रवेश कर सकूं और यहां कोई कारोबार जमा सकूं। मैंने फिलाडेल्फिया में पांच फरवरी 2006 को नाम बदलने के लिए आवेदन दिया था। मैंने नए नाम से पासपोर्ट लेने के लिए अपना नाम बदलकर डेविड हेडली रख लिया।

मैं नया पासपोर्ट चाहता था ताकि मैं एक अमेरिकी पहचान के साथ भारत में दाखिल हो सकूं। मैंने भारतीय वीजा आवेदन में उसने अपनी असल पहचान छिपाने के लिए सभी ‘झूठी’ जानकारियां दीं। जब मुझे नया पासपोर्ट मिल गया तो मैंने लश्कर-ए-तैयबा में अपने साथियों को यह बात बताई। इनमें से एक साथी साजिद मीर था। यही वह व्यक्ति था, जिससे मैं संपर्क में था।

2-‘हाफिज था मेरा हीरो’
मैं भारत को अपने दुश्मन के तौर पर देखता था। हाफिज सईद और लश्कर के सदस्य जकीउर रहमान लखवी भी भारत को अपना दुश्मन मानते थे। मैं लश्कर प्रमुख हाफिज सईद के भाषणों से ‘प्रभावित’ होकर लश्कर में शामिल हुआ था। मैंने 2002 में पाकिस्तान के मुजफ्फराबाद में हाफिज के साथ पहली बार ‘ट्रेनिंग’ हासिल की।

3-‘ऐसे हुई मेरी ट्रेनिंग’
ट्रेनिंग के दौरान दौरा-ए-सफा कोर्स कराया जाता है। इसका आयोजन लाहौर के मुरिदके में होता है। ‘दौरा-ए-आम’ शुरुआती सैन्य प्रशिक्षण है जिसका आयोजन ‘आजाद कश्मीर’ के मुजफ्फराबाद में होता है। ‘दौरा-ए-खास’ के दौरान मुझे हथियार चलाने, विस्फोटों एवं गोला-बारूद के इस्तेमाल की ट्रेनिंग दी गई। मैंने खुफिया प्रशिक्षण कार्यक्रम ‘दौरा-ए-रिबात’ में भी हिस्सा लिया। इसका केंद्र ऐबटाबाद से 40 मील दूर मनसेरा में था।

4-‘कश्मीर में लड़ना चाहता था लेकिन…’
मैं भारतीय सैनिकों से लड़ने के लिए कश्मीर जाना चाहता था, लेकिन मुझे इस काम के लिए ‘बहुत उम्रदराज’ बताया गया। लखवी ने मुझसे कहा कि वे मुझे किसी और मकसद के लिए इस्तेमाल करेंगे।

5-‘पाक में ISI अधिकारियों से मिला’
पाकिस्तान में मैं आईएसआई के तीन अधिकारियों मेजर अली, मेजर इकबाल और मेजर अब्दुल रहमान पाशा के संपर्क में आया था। मेजर अली ने मेरा परिचय मेजर इकबाल से कराया था क्योंकि उसे लगा कि मैं खुफिया कार्य में इस्तेमाल किया जा सकता हूं।

6-’26/11 से पहले दो बार हमले की कोशिश’
मुंबई में 26 नवंबर, 2008 की रात मुंबई के कई अहम स्थानों पर हमला करने वाले 10 आतंकियों ने सितंबर और अक्टूबर के महीने में दो बार मुंबई पर हमले की योजना बनाई थी, लेकिन उनके मंसूबे नाकाम रहे थे। एक मौके पर उनकी नाव समुद्र में चट्टान से टकरा गई थी जिस वजह से उनके सभी हथियार एवं गोला-बारुद नष्ट हो गए थे और ऐसे में उन्हें वापस लौटना पड़ा था।

7-‘जब मैं पहली बार भारत गया’
भारत के पहले दौरे से पूर्व साजिद मीर (मुंबई हमले का एक आरोपी) ने मुझे निर्देश दिया कि मुंबई में जगहों का विडियो बनाऊं। मैं 2008 के आतंकी हमले से पहले सात बार मुंबई आया और हमले के बाद एक बार मार्च, 2009 में दिल्ली गया था।

8- ‘राणा ने दिलाया भारत का वीजा’
तहव्वुर हुसैन राणा (पाकिस्तानी सेना के पूर्व फिजिशनन राणा को डेनिश अखबार पर हमले की साजिश के मामले में दोषी ठहराया गया है) ने भारत का पांच साल का वीजा दिलाने में मदद की। राणा मुंबई हमलों के बारे में कुछ जानता था। मैंने उसे कहा कि वह भारत नहीं आए। राणा भारत की यात्रा के मेरे मकसद को जानता था।

9 – ‘मेरा वीजा देखकर खिल उठे मीर, इकबाल’
मैंने भारतीय वीजा मिलने के बारे में साजिद मीर और आईएसआई के मेजर इकबाल को बताया। वे मेरा भारतीय वीजा देखकर खुश थे।

10-‘मुंबई में खोला गया मेरा ऑफिस’
मुंबई में मेरा कार्यालय स्थापित किया गया ताकि मैं भारत में इसकी आड़ ले सकूं। यह आड़ जरूरी थी ताकि मेरी असली पहचान का पता नहीं चल सके।

क्या है हेडली का गुनाह
हेडली ने 2006 और 2008 के बीच कई बार भारत की यात्रा की। नक्शे खींचे, विडियो फुटेज ली और हमले के लिए ताज होटल, ओबरॉय होटल और नरीमन हाउस समेत विभिन्न ठिकानों की जासूसी की। हेडली की जासूसी ने हमला करने वाले लश्कर के 10 आतंकवादियों और उनके आकाओं को अहम जानकारी उपलब्ध कराई।

हेडली ऐसे बना सरकारी गवाह
अदालत ने 10 दिसंबर 2015 को हेडली को इस मामले में सरकारी गवाह बनाया था और उसे आठ फरवरी को अदालत के समक्ष पेश होने को कहा था। उस समय हेडली ने विशेष न्यायाधीश जी. ए. सनप से कहा था कि अगर उसे माफ किया जाता है तो वह ‘गवाही देने को तैयार’ है। न्यायाधीश सनप ने हेडली को कुछ शर्तों के आधार पर सरकारी गवाह बनाया था और उसे माफी दी थी। मुंबई पुलिस ने पिछले साल आठ अक्टूबर को अदालत के समक्ष याचिका दायर कर कहा था कि हेडली के खिलाफ भी इस मामले में मुंबई हमलों के अहम साजिशकर्ता अबू जिंदाल के साथ इस अदालत में मुकदमा चलाया जाना।


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