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कोहराम डेस्क 20 सितम्बर 2016 

जब-जब भारतीय सेना पर या देश पर कोई बड़ा हमला होता है तो देश की जनता की वो यादें ताज़ा करा देता है जब इससे पहले भारत पाकिस्तान और चीन से युद्ध कर चूका है हालाँकि उस समय के मुकाबले भारत की शक्ति कई गुना बढ़ चुकी है. एटॉमिक पॉवर होने के साथ साथ अत्याधुनिक पनडुब्बी और मिसाइलों से लेस भारतीय सेना एशिया की एक प्रभावशाली शक्ति के रूप में स्थापित है. हम जिस तरह अपने देश की सेना पर नाज़ करते है वैसे ही कुछ ऐसे नेता भी हुए है जिन्होंने देश को हमेशा सर्वोपरि रखा यहाँ तक की अपनी निजी ज़रूरतों को भी कम कर दिया. इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, एपीजे अब्दुल कलाम ऐसे नेता रहे है जिन पर देश हमेशा नाज़ करता है.

पाकिस्तान से लड़ाई के लिए गोली बनाने के लिए महिलाओं ने दी चांदी

जैसा की हमनें पहले भी बताया की इंदिरा गाँधी का नाम उन नेताओं में गिना जाता है जिन्होंने देश को हमेशा सर्वोपरि रखा. सूचना एवं प्रसारण मंत्री के तौर पर इंदिरा गांधी 16 अप्रैल, 1965 को मुडारी गांव पहुंचीं थीं. जैसा की गाँव वाले बताते है की इंदिरा को तौलने के लिए गांववालों से एक दिन में 54 किलो चांदी इकट्ठा की गई।  इंदिरा को गांव के लोगों ने तराजू पर बैठाया और दूसरी ओर चांदी से भरा बोरा रख दिया, लेकिन चांदी कम पड़ गई।

चांदी कम पड़ी तो महिलाओं ने उतार कर दिए अपने जेवर

 कार्यक्रम का नेतृत्व कर रहे छविलाल पुरोहित ने ये समस्‍या महिलाओं को बताई।  इसके बाद कई घरों की महिलाओं ने अपने गहने-जेवर उतारकर दे दिए। इस तरह करीब 2 किलो जेवर कुछ ही देर में इक‍ट्ठे हो गए। इन्‍हें तराजू पर रखते ही दोनों पलड़े बराबरी पर आ गए. एक बार आप सोच कर देखिये कैसा माहौल रहा होगा जब ज़िन्दगी भर संजोकर रखे गये जेवर कुछ ही देर में सिर्फ और सिर्फ देश के लिए उतार कर दे दिए. 95 साल के छविलाल कहते हैं कि 1965 में चीन से युद्ध की तैयारी थी। इंदिरा गांधी लोगों से आर्थिक मदद की अपील कर रही थीं।  इसीलिए उनके वजन जितनी चांदी देश के राष्ट्रीय सुरक्षा कोष में जमा कराई गई थी। इसके बाद जिस तराजू पर इंदिरा को तौला गया, उसे स्‍थाई कर दिया गया।
एक ओर इंदिरा की मूर्ति तराजू पर रखवा दी गई।

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सवाल यह उठता है की आखिर क्यों महिलाओं ने अपने हाथों के गहने तक उतार दिए ?

भारत पाकिस्तान के युद्ध से लगभग 3 वर्ष पहले सन 1962 में जब भारत पाकिस्तान से युद्ध कर रहा था तब युद्ध के कारण आर्थिक स्थिति इतनी अधिक बेहतर नही रही थी तब जब एक बार फण्ड एकत्र किया जा रहा था उस समय इंदिरा गाँधी ने अपने हाथों के जेवर तक उतार के नेशनल डिफेन्स फण्ड में दे दिए थे. यही एक वो कारण था जिसे देखकर 1965 में युद्ध के समय ग्रामीणों ने सिर्फ 2 घंटे में 54 किलोग्राम चांदी और 2 किलोग्राम सोना-चांदी जमा कर ली.

हैदराबाद के निजाम ने 500 किलोग्राम सोना देकर 1965 के युद्ध के समय भारत सरकार की मदद की थी 


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