kuds

अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस पवित्र रमजान महीने के अंतिम शुक्रवार को होता है जिस को मनाने का उद्दश्य फिलिस्तीन और मस्जिद ए अक्सा की आजादी और फिलिस्तीनियों पर इजराइल के अत्याचार का विरोध करना और फिलिस्तीन को अपना समर्थन देने के लिए दुनिया भर के मुसलमान ‘अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस’ मनाते हैं जिस की नीव ईरान की इस्लामी क्रांति के संस्थापक स्वर्गीय “विद्वान् खुमैनी” ने 13 रमजान 1399 हिजरी (सन 1979) को फिलिस्तीनी जनता के समर्थन के लिए रखी थी ।

इस दिन शुक्रवार(जुमा) की नमाज़ (प्रार्थना) से पहले फिलिस्तीन पर कब्जा और उसकी जनता पर इजराइल के अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन करते हैं , और अंत में शुक्रवार(जुमा) की नमाज़ को अदा करते हैं। कुछ देशों में शुक्रवार को पुलिस (प्रशासन) की रक्षा कारणों से अनुमति न मिलने के कारण किसी दूसरे दिन यह प्रदर्शन कर किये जाते हैं कुछ स्थानों पर प्रदर्शन के बजाय सिर्फ सभा या सेमीनार किये जाते हैं अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस इस्लामी और गैर इस्लामी देशों में प्रदर्शन किये जाते हैं।

बैतुल मुकद्दस मुसलमानों का पहला किबला था। जो फिलिस्तीन में मौजूद है। इस्लामिक शिक्षाओं के अनुसार यह पवित्र स्थान दुनिया में स्वर्ग के चार महलों में से एक है।
 मस्जिद ए हराम (काबा)
 मस्जिद ऐ नबवी
 मस्जिदे बैतुल मुकद्दस
 मस्जिदे कूफा है।

इस्लाम सदैव अत्याचार का विरोध करने की शिक्षा देता है इसी लिए आज के समय में अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस का उदश्य केवल फिलिस्तीन और मस्जिद ए अक्सा की आजादी नही रहा है बल्कि जिस देश में भी अत्याचारी शासक हैं या जहाँ पर भी कोई अत्याचार हो रहा हो उस के खिलाफ आवाज़ उठाई जाती है भले ही अत्याचार किसी मुस्लमान पर हो या किसी ग़ैर मुस्लमान के साथ उसका विरोध किया जाता है।

अंतराष्ट्रीय कुद्स दिवस भारत के अलग अलग हिस्सों में भी मनाया जाता है जिस में केवल मुस्लमान ही नही बल्कि दुसरे धर्मों के लोग भी एकत्रित होकर अत्याचार के विरोध में पर्दशन व आन्दोलन करते हैं।


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