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91 साल के कृष्ण कुमार खन्ना बंटवारें के बाद पाकिस्तान छोड़कर भारत आ गये थें. बुजुर्गों की जमीन से जुडी पुरानी यादों को हमेशा अपने दिल से लगाये हुए रहते थे. उनकी इच्छा थी कि जीवन में एक बार वह अपने गांव शेखपुरा (पाकिस्तान) जा पायें. हाल ही में वह पाकिस्तान से लोटें हैं.

उन्होंने अपनी यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि जब वे पाकिस्तान स्थित अपने निवास पर पहुंचे, जहां उन्हें लोगों का खूब प्यार मिला. उन्होंने बताया, ‘शेखपुरा में लोगों ने जिस तरह मेरा स्वागत किया वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है. वे लोग मुझे मेरे पुराने घर और दुकान का असली मालिक कह रहे थे.’

उन्होंने आगे कहा, ‘वहां के लोगों ने हमारे रहने खाने के साथ घूमने का भी इंतजाम किया. उन्होंने हमारी हर सुविधा का खयाल रखा.’ खन्ना शेखपुरा के अलावा लाहौर और ननकाना साहिब भी गए. इस दौरान पाकिस्तान के लोगों ने उन्हें बताया, ‘यह जो कुछ भी हो रहा है, सब राजनीति है. हम भी अपने पूर्वजों की याद में भारत जाना चाहते हैं, लेकिन हमें आसानी से वीजा नहीं मिल पाता है.’

उन्होंने आगे बताया, वे जब शेखपुरा की मंडी में उनकी दूकान पर पहुचे तो दुकान के मालिक फारुख अहमद वहां के लोगों को उनका परिचय दुकान के असली मालिक के रूप में दिया. वे पाकिस्तान से लौट कर काफी खुश हैं. उन्होंने कहा, हम लोग ज्यादातर केवल मीडिया या राजनीति के कारण ज्यादा बैर व नफरत के शिकार हो जाते हैं, जबकि आम व्यक्ति व पाकिस्तान के विस्थापित लोग जब भी पाकिस्तान में गूरूद्वारे या अपने पैत्रीक घर या गांव जाते हैं तो उनको पाकिस्तान के स्थानीय लोगों के द्वारा बहुत ही अच्छा आदर सत्कार मिलता है.


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