हिन्दी फिल्म ‘जिगर’ में अभिनेता गुलशन ग्रोवर बार बार एक डायलॉग बोलते हैं कि ‘हम इंस्पेक्टर जरा दूजे किस्म के है’ दरअस्ल वे जिस ‘दूजे किस्म’ को फिल्म में बार बार कहते हैं वह दूजा किस्म उनकी इमानदारी होती है। फिल्म में वे एक इमानदार इंस्पेक्टर की भूमिका में थे। खैर घटना 20 सितंबर 2008 की है उस इरशाद त्यागी जीआरपी में सब इंसपेक्टर हुआ करते थे, वे लखनऊ के चारबाग स्टेशन पर तैनात थे। 20 सितंबर 2008 को रुड़की का एक परिवार अपनी लड़की की शादी करने के लिये रुड़की से लखनऊ आया था, लखनऊ पहुंचकर वे विवाह स्थल पहुंच गये वहां जाकर याद आया कि जिस बैग में आभूषण और नकदी थी वह बैग वे ट्रेन में ही भूल आये हैं। वे वापसी स्टेशन आये जिस ट्रेन से वे आये थे वह तो यार्ड में ही खड़ी थी मगर वह बैग उस ट्रेन में नहीं मिला।

जिस महिला का वह बैग था जब वह उसे ट्रेन में नहीं मिला इस सदमे से वह वहीं बेहोश होकर गिर गई। घटना ही ऐसी थी उधर बेटी की शादी है और अचानक आभूषण व नकदी गुम हो जायें तो पैरों के तले से जमीन का खिसकना लाजिमी था।

उधर वह बैग सब इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी को मिल चुका था और वे यह पता लगाने में लगे थे कि यह बैग आखिर किस यात्री का है ? उन्होंने उस बैग को खोला इत्तेफाक ऐसा हुआ कि उस बैग में एक विजिटिंग कार्ड भी था जो उसी परिवार के सदस्य का था जिसका वह बैग था। उन्होंने उस पर फोन किया और उन लोगों से कहा कि स्टेशन स्थित जीआरपी के दफ्तर से आकर बैग ले जायें, इरशाद त्यागी ने ईमानदारी का सबूत देते सही सलामत वह बैग लौटा दिया। अगले दिन लखनऊ के अखबारों में एक खबर प्रकाशित हुई जिसका शीर्षक था ‘खाकी के दो रंग’ इस खबर में एक तरफ सब इंस्पेक्टर इरशाद त्यागी का तस्वीर थी जिसमें उनकी ईमानदारी का किस्सा था, तो दूसरी तरफ एक और दरोगा की तस्वीर थी जो इत्तेफाकन उसी रोज रिश्वत लेने के आरोप में निलंबित किया गया था।
चाणक्य ने कहा था कि ‘ज्यादा इमानदारी सफलता के लिए ठीक नहीं है।’ चाणक्य तब भी गलत थे और चाणक्य आज भी गलत हैं, इमानदारी का सफलता या विफलता से कोई संबंध नहीं होता दरअस्ल इमानदारी अपने आप में खुद एक ऐसी सफलता होती है जिसका मजा ही अलग होता है, इसीलिये पूर्व राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन ने राष्ट्र को संबोधित करते हुऐ कहा था कि ‘अगर कोई आपसे कहे कि ईमानदारी, सच्चाई के रास्ते पर चलने से कोई फायदा नही है तो उसकी बातो का मजाक मत बनाना बल्कि वह बिल्कुल सही कह रहा है इसमें कोई फायदा नही है लेकिन फिर भी मैं आपसे कहुंगा कि ईमानदारी की राह को हरगिज मत छोड़िये।’ इरशाद त्यागी उन चुनिंदा पुलिसकर्मियों में से एक हैं जो अपने फर्ज को इमानदारी से करते हैं। लखनऊ के पत्रकारों संगठन ऑल इंडिया न्यूजपेपर ऐसोसिएशन ने उन्हें इमानदारी से अपना फर्ज निभाने साथ ही समाज सेवा में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेने के लिये सम्मानित किया है। जिसके वे हकदार भी थे

बकौल मुनव्वर राना –
गुलाब ऐसी ही थोड़ी गुलाब होता है
ये बात कांटों पर चलने के बाद आती है।


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