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आगरा –  पिछले दिनों सांप्रदायिक तनाव के लिए चर्चा में बने हुए आगरा से एक अच्छी खबर आई है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को 15 साल की नाजिया को रानी लक्ष्मीबाई बहादुरी पुरस्कार दिया। नाजिया मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। उन्होंने पिछले साल अगस्त में 6 साल की एक बच्ची की जान बचाई थी। वह बच्ची हिंदू थी।

7 अगस्त 2015 को साघिर फातिमा मुहम्मदिया गर्ल्स इंटर कॉलेज में पड़ने वाली नाजिया घर लौट रही थीं। रास्ते में उन्हें एक बच्ची की चीख सुनाई दी। बाइक पर सवार 2 युवक 6 साल की एक बच्ची डिंपी को उठाकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे और बच्ची मदद के लिए चीख रही थी। नाजिया ने अपनी हिफाजत के बारे में नहीं सोचा और बिना समय गंवाए डिंपी की मदद करने के लिए दौड़ पड़ीं। उन्होंने डिंपी को बाइक सवार युवकों के हाथ से छीन लिया और उसे लेकर वहां से भाग गईं। नाजिया को बाद में पता चला कि डिंपी भी उन्हीं के स्कूल में पढ़ती है।

आज जब विश्व हिंदू परिषद के नेता की हत्या के बाद आगरा में सांप्रदायिक तनाव बना हुआ है, ऐसे में डिंपी का हिंदू परिवार नाजिया को अपनी बेटी की तरह प्यार करता है। पुरस्कार जीतने के बाद फोन पर हमसे बात करते हुए नाजिया ने बताया कि घटना के समय उन्होंने वही किया जो उन्हें सही लगा। वह बताती हैं कि उस समय उनके दिमाग में एक मिनट के लिए भी अपनी सुरक्षा की बात नहीं आई थी। वह बताती हैं, ‘दोपहर लगभग 12.30 का समय था जब मैंने डिंपी की चीख सुनी। मैं दौड़कर वहां गई और मैंने उसका हाथ जोर से पकड़ लिया। लगभग 2 मिनट तक खींचतान चलती रही। बाइक पर सवार दोनों युवक डिंपी को खींचकर ले जाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मैंने अपनी पूरी ताकत लगाकर डिंपी को पकड़े रखा।’ नाजिया बताती हैं कि आखिरकार अपहरणकर्ता हारकर वहां से भाग गए।

नाजिया बताती हैं कि यह वाकया उनके सदरभट्टी इलाके में उनके स्कूल में महज 100 मीटर की दूरी पर हुआ था। वह दौड़कर अपने स्कूल गईं और उन्होंने प्रिंसिपल को वाकये की जानकारी दी। नाजिया बताती हैं, ‘डिंपी रो रही थी। स्कूल के लोगों ने पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद मैं उसे उसके घर लेकर गई। उसका परिवार अब मुझे अपनी बेटी की तरह प्यार करता है और डिंपी मुझे दीदी कहती है।’

जब हमने डिंपी से संपर्क किया, तो उसने कहा कि उसे दीदी (नाजिया) को पुरस्कार मिलने की बहुत खुशी है। डिंपी ने कहा, ‘अगर दीदी उस दिन ना होतीं, तो वे लोग मुझे ले जाते।’ नाजिया खुद को दिए गए पुरस्कार को अपने लिए गर्व मानती हैं। उनका कहना है कि जिंदगी में अगर फिर कभी ऐसा मौका आया, तो वह फिर से ऐसा ही करेंगी। नाजिया को पुरस्कार के साथ 1 लाख रुपये का इनाम भी मिला है।


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