अपनी माँ के साथ तैयब्बा
अपनी माँ के साथ तैयब्बा

बिहार बोर्ड द्वारा इंटरमीडिएट की परीक्षा का परिणाम घोषित होते ही सूबे में खुशियों का पैग़ाम आम हो गया. तो वही कुछ को निराशा भी मिली.

कुछ ने विषम परिस्थितियों में भी अपने हौसले से पत्थर का सीना चीर कामयाबी की इबारत लिखी है. जिसमे से एक सरहसा के बख्तियारपुर बस्ती निवासी मोहम्मद रब्बा की बेटी तैय्यबा जिसने इंटरमीडिएट आर्ट्स की परीक्षा में सूबे में चौथा स्थान हासिल किया है.

बिहार राज्य की रहने वाली तैय्यबा एक आम इंसान की बेटी है इसके पिता दिल्ली में दर्ज़ी का काम करते है, और माँ एक आशा वर्कर है.साधारण परिवार में पली-बढ़ी तैय्यबा की सफलता से परिवार, नातेदार सहित आसपास के लोग भी बेहद खुश हैं।

ऐसे ख़ास मौकों पर दुष्यंत कुमार का यह शेर ही याद आ जाता है. कैसे आकाश में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों. पर्याप्त साधनों की कमी के कारण कोई काम को करने का प्रयास न करना तो बेहद आसान है जोकि अधिकतर लोग करते है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जिनका विशवास, इच्छाशक्ति, लगन और महनत उनको गिरने नहीं देती जिसको बिहार की तैयब्बा ने सच करके दिखाया.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment

Related Posts

loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें
SHARE