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आपको याद होगा लगभग महीना भर पहले आज़मगढ़ में क़ुरान के कथित अपमान के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ पोस्ट वॉयरल हुए थे. जिन्हें कई लोगों की आपत्ति के बाद हटा भी लिया गया था. हालांकि ये अलग बात है कि पूरा मामला निपटा लिए जाने के बाद भी ऐसे बेहद भड़काऊ और आपत्तिजनक पोस्ट्स आते रहे.

अब फिर से आज़मगढ़ में माहौल ख़राब होने की बातें कही जा रही है. ये अलग बात है कि ज़मीनी स्तर पर प्रशासन ने हालात पर काबू पा लिया है. स्थानीय प्रशासन ने आज़मगढ़ में दो दिनों के लिए इंटरनेट पर पाबंदी भी लगा दी है.
लेकिन ऐसी नौबत क्यों आई?

इसका सीधा सा जवाब है कि सोशल मीडिया बंदर के हाथ में उस्तरा जैसा बन गया है. लोगों में इंटरनेट या सोशल मीडिया लिट्रेसी नहीं है लेकिन उनके हाथ में ताक़तवर स्मार्टफ़ोन आ गए हैं जो न सिर्फ़ तस्वीरें और वीडियो ले सकते हैं बल्कि तेज़ इंटरनेट स्पीड से उन्हें बहुत जल्दी प्रसारित भी कर सकते हैं. ऐसे हालात में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों को थोड़ा ज़िम्मेदार होने की ज़रूरत है.

यदि आपके पास आगे पढ़ने का समय है तो इन बिंदुओं पर ध्यान दें-
1. अफ़वाहों पर ध्यान न दें.
2. अफ़वाह और हक़ीक़त में फ़र्क़ करना सीखें.
3. जिन बातों या घटनाओं से आपका सीधा संबंध नहीं है उनपर ज़्यादा ध्यान न दें.
4. दिल्ली में बैठकर आज़मगढ़ या अमरोहा की उन घटनाओं के बारे में टिप्पणी या पोस्ट न करें जिन्हें आप व्यक्तिगत स्तर पर वैरीफ़ाई न कर सकते हों.
5. यदि आपने ऐसी किसी घटना को वैरीफ़ाई भी कर लिया है और आपको लगता है कि ये सही है तब भी उसके बारे में सार्वजनिक रूप से तब तक न लिखें जब तक कि वो जनहित में न हो.
6. किसी भी तरह की भड़काऊ भाषा से हर तरह से बचें. न भड़काऊ भाषा लिखें और न पढ़ें.
7. यदि आपको लगता है कि आपका हस्तक्षेप बेहद ज़रूरी है तो सोशल मीडिया पर पोस्ट करने से पहले संबंधित क्षेत्र के ज़िम्मेदार अधिकारियों को ईमेल, व्हास्टसएप या मोबाइल संदेश के जरिए लिखें.
8. अपनी टाइमलाइन में उन लोगों की पहचान करें जो लगातार भड़काऊ पोस्ट करते हैं. उनके प्रोफ़ाइल को रिपोर्ट करें. यदि वो आपके मित्र हैं तो उन्हें समझाएं कि ऐसी पोस्ट से बचें.
9. सामाजिक सौहार्द क़ायम करने की जितनी ज़िम्मेदारी प्रशासन की है उतनी ही आपकी भी. प्रशासन से अपनी ज़िम्मेदारी निभाने की उम्मीद करने से पहले आप अपनी ज़िम्मेदारी निभाएं.
10. इंटरनेट लिट्रेट बनें. सोशल मीडिया का इस्तेमाल ज़िम्मेदारी से करें.

दिलनवाज़ पाशा की फेसबुक वाल से 


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