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उदयपुर। यह कब्रिस्तान सुन्नियों का है। यहां वहाबी, देवबंदी और अन्य फिरकों को दफनाना मना है। अगर किसी ने ऐसा किया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। यह फरमान स्थानीय कब्रिस्तान प्रबंधकों ने उदयपुर में रह रहे ऐसे मुस्लिम लोगों के लिए जारी किया है, जो वहाबी और देवबंदी फिरकों से जुड़े हैं। चेतावनी पिछले दिनों खांजीपीर निवासी बुजुर्ग मौली व्यवसायी मुहम्मद युसुफ को वहाबी घोषित कर उनकी मैयत को निकाल बाहर फेंकने की घटना के करीब एक महीने बाद जारी हुई है। इसे लेकर स्थानीय मुस्लिम समाज में भी भारी चर्चा है।

हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों ने इस तरह की जानकारी होने से इनकार किया है, लेकिन और कब्रिस्तान प्रबंधक तथा मुस्लिम नेता फिलहाल इस मामले में खुलकर नहीं बोल रहे हैं। यह जरूर बताया गया कि पिछले दिनों खांजीपीर निवासी मुहम्मद युसुफ को वहाबी घोषित कर दिया गया था और उनकी दफनाई हुई मैयत को 9 फरवरी की सुबह निकाल कर उनके घर के दालान में छुड़वा दिया गया था। इसके बाद उनके बेटों ने अपने पिता की मैयत को मध्यप्रदेश के मंदसौर जाकर वहां के कब्रिस्तान में सुपुर्दे खाक किया था।

यह ना मजहब की बात, ना शरीअत : मोहम्मद खलील

अंजुमन तालिमुल इस्लाम के सदर मोहम्मद खलील ने कहा : अगर किसी ने ऐसा लिखा है तो यह ना मजहब की बात है और ना शरीअत की। यह सियासत है और यह ठीक नहीं है। कब्रिस्तान की दीवारों पर यह किसने लिखा, वक्फ बोर्ड को इसकी जांच करवानी चाहिए।

ये भेदभाव पैदा करने वाली बात : हामिद

मुहम्मद यूसुफ के बेटे और यहां जिला अदालत में अधिवक्ता हामिद हुसैन ने बताया कि कब्रिस्तान की दीवारों पर ऐसे फरमान लिखना भेदभाव और नफरत पैदा करने वाली बात है। इतनी असहिष्णुता ठीक नहीं है। समाज का पढ़ा-लिखा तबका डरा हुआ है। स्थानीय मुस्लिमों में ऐसी कट्‌टरता नहीं। लेकिन यह तय है कि इस तरह की कट्‌टरता फैलाने वाले बाहरी लोग हैं।

यह मामला दुर्भाग्यपूर्ण

यह मामला दुर्भाग्यपूर्ण था। समझाइश के बाद यह मामला अब खत्म हो गया है। मरने के बाद तो सरकार भी हिसाब-किताब माफ कर देती है। मैयत को नहीं निकालना चाहिए था। -मोहम्मद इब्राहिम , वक्फ बोर्ड अध्यक्ष

विवाद ना हो, इसलिए लिखा

यह इसलिए लिखा ताकि विवाद ना हो। एक बार जो विवाद हुआ, वह दुबारा न हो। – शराफत खान , सदर पलटन मस्जिद चेतक सर्किल

ऐसा तो अंदर भी लिखा है

ऐसा तो कब्रिस्तान के अंदर भी लिखा है। इस संदेश को अभी प्लेट पर भी लिखवाना है। – मोहम्मद भाई, अश्विनी बाजार कब्रिस्तान के देखरेखकर्ता


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