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लंदन। सोशल नेटवर्किंग वेबसाइट्स जैसे फेसबुक और ट्वीटर पर 20 प्रतिशत से भी कम लोग सच बोलते हैं। इस बात का खुलासा ब्रिटेन द्वारा किए गए एक अध्ययन से सामने आया है।

2000 लोगों पर किए गए सर्वे में यह पता चला कि सोशल मीडिया पर केवल 18 प्रतिशत लोग ही खुद को सही रूप से दर्शाते हैं जबकि अधिकांश यूजर्स वैसे ही कंटेंट को पोस्ट करते हैं जिससे वे अपने दोस्तों व परिवार के सामने अच्छे और रोचक बने रहें। सर्वे के परिणाम में यह भी पता चला कि महिलाओं की अपेक्षा पुरुष सोशल मीडिया पर अधिक झूठ बोलते हैं।

करीब 43 प्रतिशत पुरुषों ने यह स्वीकार किया कि उनका सोशल मीडिया प्रोफाइल उनके वास्तविक जीवन का सही रूप नहीं दर्शाता है। करीब एक तिहाई प्रतिभागियों ने कहा कि फेसबुक और ट्वीटर पर उनका प्रोफाइल पेज उनके वास्तविक जीवन से शत प्रतिशत मेल खाता है, उन्होंने बोरिंग बातों को हटा दिया है।

करीब 14 प्रतिशत यूजर्स ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपना प्रोफाइल कुछ इस तरह बनाया है कि देखने से ऐसा लगे कि वे सोशल लाइफ में काफी सक्रिय हैं जबकि हकीकत ऐसा नहीं है।

डिजिटल मार्केटिंग एजेंसी, ‘कस्टर्ड’ के सर्वे में यह दर्शाया गया है कि ब्रिटिश सोशल नेटवर्क यूजर्स अन्य लोगों का ध्यान आकर्षित करने वाले स्टेटस लगाते हैं। इस प्लेटफार्म पर पार्टनर व बच्चे के फोटो की पोस्टिंग को पहला सबसे अधिक परेशान करने वाला पोस्ट माना गया वहीं दूसरे नंबर पर ढेर सारे सेल्फी अपलोड वाले पोस्ट की रैंकिंग की गयी है। एक चौथाई यूजर्स का मानना है कि सोशल मीडिया पर कुछ पोस्टिंग उन्हें मुसीबत में डाल देते हैं जैसे पॉलिटिक्स, धर्म व अन्य मुद्दों पर किए गए पोस्ट पर किसी अन्य यूजर से बहस हो जाती है।


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