कहते है इतिहास गोल होता है वो एक अंतराल के बाद खुद को दोहराता रहता है, जो आज है हो सकता है कुछ समय बाद फिर वही लेकिन सबसे मुख्य बात यह है की इतिहास दोहराने में समय लगता है. जब लगभग 800 वर्ष भारत पर मुस्लिम हुकूमत रही तब लोगो के दिलो-दिमाग से यह बात पूरी तरह निकल चुकी थी की भारत पर मुस्लिमों की जगह कोई और भी सत्तानशीन हो सकता है लेकिन अंग्रेजो के शासन ने बता दिया की सत्ता अचर नही होती वो बदलती रहती है इतिहास गवाह है की जिन राजाओं/बादशाहों ने जनता के साथ इंसाफ किया उनका राज्य लम्बे समय तक टिका जब तक की उनकी नस्लों में कोई अय्याश,भोग विलासी, क्रूर शासक ने जन्म नही ले लिया.

आज जो खबर सामने आई वो यह की मुस्लिम महिलाओं ने पीएम मोदी के लिए राखी भेजी है और उनसे गुहार लगायी है की भाई बनकर उनकी रक्षा कीजिये उनकी मदद कीजिये. इस खबर को पढ़कर जो बात सबसे पहले जहन में आती है वो यह की कई सौ वर्ष पूर्व भी ऐसा हो चूका है जब एक हिन्दू महिला ने तत्कालीन बादशाह हुमांयू को राखी भेजीं थी और उनसे कहा था की “हिन्दू लोग जिसे अपना भाई मानते है उसके हाथ में राखी बांधते है और भाई का फ़र्ज़ होता है अपनी बहन की रक्षा करना. आज हमारे राज्य चित्तौड पर बहादुर शाह ने हमला किया है, aap हमारी मदद कीजिये”.

हुमांयू के मन में एक बार भी यह बात नही आई की हिन्दू महिला के त्यौहार से मुझे क्या मतलब और इस हिन्दू के कारण में क्यों मुस्लिम बादशाह से जंग करूं ? उसने राखी का मान रखा और फैसला किया की वह उसकी मदद ज़रूर करेगा.

अपना वादा निभाने के लिए वह विशाल सेना लेकर चित्तौड की तरफ चल पड़ा लेकिन हाथी घोड़ों के उस ज़माने में उसे पहुँचते पहुँचते काफी देर हो गयी और तब तक बहादुर शाह ने चित्तौड पर अपना कब्ज़ा जमा लिया. वहीँ रानी कर्णावती ने जौहर कर अग्नि में समावेश कर लिया. जब यह खबर हुमांयू को मिली तो उसे बहुत दुःख हुआ और उसने बदले में बहादुर शाह पर हमला कर दिया जिसमे उसे जीत मिली और जीता हुआ राज्य रानी कर्णावती के बेटे विक्रमजीत को सौंपकर वापस चला गया.

यह तो थी रानी कर्णावती की कहानी जिसके लिए उसके एक गैर-हिन्दू भाई ने अपने धर्म के ही बादशाह से जंग की. वहीँ आज कुछ मुस्लिम महिलाओं ने आज के बादशाह मोदी के लिए राखी भेजी है जिसमे उन्होंने अपने लिए मदद की गुहार लगायी है चूँकि मदद एक ऐसा शब्द है जिसमे बहुत कुछ समाहित है लेकिन पहले हम यह देखते है की आखिर मुस्लिम महिलाओं को कहाँ कहाँ और क्या मदद चाहिए

1 – मुस्लिम महिलाओं के घर के पुरुष सदस्यों को आज घर से बाहर निकलते हुए डर लग रहा है की कहीं कोई उन्हें मॉब लिंचिंग का शिकार ना बना दे.

2 – मुस्लिम महिलाओं के पढ़े लिखे ग्रेजुएट बच्चे आज बेरोजगार घूम रहे है, उन्हें बस एक आस है की किसी तरह उन्हें नौकरी मिल जाए.

3 – मुस्लिम बहनों के घरों में घुसकर पुलिस बर्तन चेक कर रही है की उन्होंने खाना में क्या बनाया है और कुछ ना मिलने पर उन्हें झूठे मुक़दमे में फंसा दिया गया है वो सभी मुस्लिम महिलाओं को उम्मीद है की उनका राखी भाई उनके लिए ज़रूर मदद भेजेगा.

4 – मुस्लिम महिलाओं की दयनीय हालत से सभी लोग अवगत है प्रसव सम्बन्धी समस्याओं के लिए उनके पास इतने पैसे नही होते की प्राइवेट अस्पतालों में जा सके और सरकारी अस्पतालों की स्थिति के मामले में हालात ज्यादा अच्छे नही है, क्यों ना मुस्लिम इलाकों में प्रसव केद्र खोल दिया जाए जिसमे जच्चा-बच्चा से संबधित समस्याओं का इलाज हो.

5 – शिक्षा को लेकर अभी तक भारतीय मुस्लिम समुदाय की महिलाओं में वो जागरूकता देखने को नही मिली है जो अन्य धर्मों की महिलाओं में है, मुस्लिम बहने शिक्षा हासिल करना चाहती है लेकिन समाज और घर परिवार के बधनों के कारण मोहताज रह जाती है क्यों ना मुस्लिम इलाकों की आगनबाडी केन्द्रों में विवाहित-अविवाहित- वृद्ध मुस्लिम महिलाओं के लिए शिक्षा का इंतज़ाम किया जाये.


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