मध्यप्रदेश का मांडू ख्यात पर्यटन स्थलों में तो शुमार है ही, साथ ही यहां का नीलकंठ महादेव मंदिर भी उतना ही मश्हूर है। जितनी कि रानी रूपमती और बादशाह बाज बहादुर के अमर प्रेम की कहानी। जी हां, मंदिर में दर्शन के लिए आसपास के क्षेत्रों के लोग तो आते ही हैं, साथ ही देश-विदेश के पर्यटक भी यहां दर्शन करने पहुंचते है। नीलकंठ महादेव से विदेशी पयर्टक भी मन्नत मांगते है।

और पढ़े -   देश के 800 शहरों में निकाला गया अमन मार्च, मीडिया से खबर गायब

neelkanth-mahadev-temple.jpg

नीलकंठ महादेव मंदिर, मांडू में विंध्याचल पर्वत श्रेणी पर स्थित मंडवगढ़ के किले में विराजित है। जो खाई के किनारे बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण अकबर काल में अकबर के विशेष कहने पर सन् 1564 में उनके सलाहकार व आर्किटेक्ट शाहबुद खा को आदेश दिया था। आदेश मिलते ही आर्किटेक्ट ने इस मंदिर का निर्माण किया। निर्माण पूरा होने के बाद अकबर ने यह मंदिर उपहार के तौर पर जोधा बाई को समर्पित किया था। अकबर जब दक्षिण भारत की यात्रा पर जा रहे थे, उस दौरान वह यहां पहुंच कर विश्राम किया था और उन्हें एक अपने जीवन का अद्भुत अनुभव हुआ, जिसका उल्लेख शिलालेखों पर मिलता है।

और पढ़े -   देश के 800 शहरों में निकाला गया अमन मार्च, मीडिया से खबर गायब

उनके बाद यह मंदिर लगातार आस्था का केंद्र बना रहा पर औरंगजेब के काल में मंदिर को एक बड़े अस्थकोणीय शीला से बंद कर दिया था। बाद में पेशवा काल 1732 में इसे फिर से खोल गया। तब से लेकर आज तक यह आस्था का केंद्र बना हुआ। प्रति वर्ष यहां कई उत्सव व अभिषेक किए जाते है। मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को 6-7 सीढिय़ां चढऩा पड़ती है। मंदिर के सामने एक बहुत ही सुंदर कुंड है और वहां की जल संरचनाएं बहुत ही बढिय़ा उदाहरण है। (patrika)

और पढ़े -   देश के 800 शहरों में निकाला गया अमन मार्च, मीडिया से खबर गायब

 


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE