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जहाँ एक तरफ पीएम मोदी सिर्फ स्किल इंडिया योजना के जरिए साल 2022 तक देश के करीब 40 करोड़ युवाओं को कुशल और दक्ष होते देखना चाहते हैं। वहीँ दूसरी तरफ ‘देश बदल रहा है नारों के बीच’ इस प्रोजेक्ट के सीओओ और ईडी जयंत कृष्णा एंड कंपनी पर यूपी के लखनऊ में कुशल भारत के नौजवानों की चीजों को चुराकर इस्तेमाल करने के गंभीर आरोप लग रहे हैं।

सच में देश बदल रहा है युवा बदल रहे हैं पर आप ही देख लीजिए आपके स्किल इंडिया के जयंत कृष्णा जिनकी जिम्मेदारी नौजवानों को कुशल और कौशल बनाने की है वह ही चोरी के आरोप में घिरे है वह क्या युवाओं को अपनी कुशलता से दक्ष और स्किल डवलपमेंट की पाठ पढ़ाएंगे।

पीएम मोदी भारतीय युवाओं से यह कहते नहीँ थकते की आपका भविष्य संवर रहा हैं। IT+ IT =IT का स्लोगन जिसमें पीएम ने कहा कि  भारतीय प्रतिभा और सूचना तकनीक मिलकर भारत के कल को सुधारेगी। अब सवाल उठता है जब पीएम की मंशा इस देश के युवाओं को काबिल और कुशल बनाने की है तो उनके ड्रीम प्रोजेक्ट स्किल इंडिया के सीओओ जयंत कृष्णा की बदनयीत कहीं न कहीं उनके प्रोजेक्ट पर काला धब्बे की तरह पूरी देश- दुनिया के युवाओं में एक गलत छाप छोड़ रही है।

स्किल इंडिया के सीओओ व लखनऊ प्रक्सप्रेशंन सोसायटी के अध्यक्ष जयंत कृष्णा से जब इस बारे में बातचीत करने की कोशिश की गई तो उन्होंने इस मामले में कोई भी जवाब देने से  इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वो इस पर जवाब फोन पर नहीं ईमेल के जरिए देना पसंद करेंगे। व्यस्त हूं बात में बात करता हूं।

अब सवाल उठता है कि स्किल इंडिया का एक सीओओ प्रधानमंत्री के डिजीटल युग में फोन पर रिपोर्टर के एक सवाल का एक जवाब देना पंसद नहीं करते हैं। इतना ही नहीं जब रिपोर्टर ने कहा कि आपको कई ईमेल भेजे जा चुके उसका आपने आजतक कोई जवाब नहीं दिया तो बात को घूमाते हुए व्यस्त होने का बहाना करने लगे।

वहीँ इस मामले में दूसरे पक्ष लखनऊ सोसायटी के सचिव शमीम आरजू का कहना है कि स्किल इंडिया के सीओओ अपने शहर के नौजवानों के कौशल को बढ़ाने की जगह उसी पर अपना अधिकार जमाना चाह रहे हैं।

शमीम आरजू ने आगे बताया, “यह मामला काफी गंभीर है क्योंकि इसमें पीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट स्किल इंडिया के सीओओ जयंत कृष्णा शामिल है। देश के युवाओं को कुशल और कौशल बनाने की जिम्मेदारी निभाने वाले ही आज नकल कर रहें हैं। वैसे आजतक यह समझ नहीं आया कि जयंत कृष्णा को ऐसी क्या दिक्कत या परेशानी आ गई कि उऩको अपने आयोजन का नाम बदलकर लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल रखना पड़ा।

मामला क्या है

अवध के साहित्यिक गलियारें में लखनऊ सोसायटी लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल नाम से प्रोग्राम साल 2013 से कराती आई है। वहीं लखनऊ एक्सप्रेंशन सोसायटी भी लखनऊ लिटरेचर कार्निवल फेस्टिवल नाम से इसका आयोजन करती है। लेकिन इस साल लखनऊ एक्सप्रेंशन ने अपने उत्सव का नाम बदलकर लखनऊ लिटरेचर फेस्टिवल नाम से प्रोमोट करना शुरू कर दिया। जो नाम लखनऊ लिटरेरी फेस्टिवल से काफी मिलता है। इस पर एतराज जताते हुए लखनऊ सोसायटी के सचिव शमीम आरजू ने पहले सोशल मीडिया पर इन नामों से बने पेजों की शिकायतें दर्ज की जिसका संज्ञान लेते हुए फेसबुक व इंस्ट्राग्राम ने इस नाम के पेज को ब्लॉक कर दिया। बाद इसके लखनऊ सोयायटी ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

स्थानीय मीडिया भी उठा चुका है यह मुद्दा 

nbt lucknow

बोलता हिंदुस्तान के सौजन्य से 


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