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जहाँ एक तरफ देश नोटबंदी को लेकर परेशान है वही दूसरी तरफ आरएसएस द्वारा प्रोत्साहित संगठन को हिन्दुओ की आबादी कम होने की चिंता खाए जा रही है, हालाँकि अगर देखा जाए तो जिन लोगो को सबसे अधिक चिंता है उनके खुद के बच्चे नही है. आरएसएस द्वारा प्रोत्साहित तीन दिवसीय धर्म संस्कृति महाकुंभ ‘हिंदू बचाओ’ के संदेश के साथ रविवार को समाप्त हुआ। इस महाकुंभ में कई ऋषियों ने हिस्सा लिया, जहां हिंदुओं से 10-10 बच्चे पैदा करने का आह्वान किया गया ताकि हिंदुओं की संख्या को बढ़ाया जा सके। दिलचस्प बात यह है कि इसी समय राष्ट्रीय जनसंख्या नीति की मांग भी उठाई गई।

गौरतलब है की एक विवादित साधू द्वारा पहले भी इसी तरह की बात कही गयी थी, जिसमे उन्होंने हिन्दू महिलाओं से 4-4 बच्चे पैदा करके एक बच्चा हिन्दू धर्म को समर्पित करने का आह्वान किया गया.

विश्व हिंदू परिषद के प्रवीण तोगड़िया ने बड़ा दुख जताते हुए कहा कि गोहत्या पर रोक लगाने पर कानून का रवैया टाल-मटोल वाला है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस मामले में तोगड़िया के विचारों के साथ सहमति जताई। वहीं, ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी गोहत्या पर वैसे ही तुरंत फैसला लेने को कहा जैसे नोटबंदी के मामले में लिया गया। उन्होंने हिंदुओं की संख्या पर चिंता जताते हुए कहा कि हर हिंदू के 10 बच्चे होने चाहिए।

वासुदेवानंद सरस्वती ने कहा, ‘दो बच्चों के नियम को त्यागकर 10 बच्चों के नियम का पालन करें। इसकी चिंता न करें कि उन्हें कौन पालेगा, भगवान आपके बच्चों का ध्यान रखेगा।’ उन्होंने आगे कहा कि हिंदुओं को ज्यादा बच्चे पैदा करने चाहिए। तोगड़िया भी इन दिनों बार-बार हिंदुत्व से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं।


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