किसने बेचा उत्तराखंड ?
कौन थे दलाल ?

गुप्ता, अग्रवाल ?

मुसलिये, कलाल ?

जोशी,रतूड़ी, पाठक, पांड़े,
नेगी,रावत, तिवारी, नौटियाल ……
किसने हमारे सर बिठाए
ये चढ्ढा,ये अंबानी,ये मित्तल-जिंदल..मालामाल ?
किस किस का नाम लूं मैं ?
हर तीसरा तो जमीन का दलाल !

जब ये दलाल ही-
बात करने लगें उत्तराखंड की ठेठ !
तो समझ लो यूं हीं नहीं बढते
“जमीनों और कमीनों के रेट !”

हम तो फिर भी लड़ेंगे ही
बाबा मार्क्स को अनसुना कर
कि-
“लड़ने वाले या जीतते हैं
या हो जाते हैं हलाल !”

हलाल तो हम हो ही गये
बिना लड़े भी
पतझर आ गया !
तभी तो-
पके भी और झड़े भी
हमारे ही बनाये सोटे
हमारे ही भेलों में पड़े भी
और पिछवाड़ा ‘लालमलाल’ !

किसने बेचा उत्तराखंड ?

कौन थे दलाल ??

deep pathak
युवा दीप पाठक – लेखक समाजसेवी और वरिष्ठ पत्रकार है

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