सिंगापुर: ईरान उस पर परमाणु गतिविधियों की वजह से लगे प्रतिबंधों के हटने के बाद दुनियाभर से सामान्य व्यापारिक संबंधों को फिर शुरू करने की बाट जोह रहा है, और लाखों बैरल कच्चे तेल को बेचने के लिए उसका खास ध्यान भारतीय और यूरोप के बाज़ार पर होगा।

ईरान से हटेंगी पाबंदियां, बढ़ेगा तेल का निर्यात, पेट्रोल की कीमतें घटेंगी भारत में!ईरान को उम्मीद है कि संयुक्त राष्ट्र की न्यूक्लियर वॉचडॉग शुक्रवार को इस बात की पुष्टि कर देगी कि ईरान ने अपने परमामु कार्यक्रम खत्म कर लिए हैं, जिससे अरबों अमेरिकी डॉलर की पूंजी इस्तेमाल के लिए आज़ाद हो जाएगी, और उन प्रतिबंधों का खात्मा हो जाएगा, जिनकी वजह से उसका तेल व्यापार लंबे अरसे से लड़खड़ाता रहा है।

रोज़ाना 500,000 बैरल तेल का निर्यात बढ़ाएगा ईरान
पाबंदियों के हटने के बाद ईरान की योजना रोज़ाना 500,000 बैरल तेल का निर्यात बढ़ाने की है, जिसे वह धीरे-धीरे दोगुना करने की फिराक में है। यदि ईरान ऐसा कर लेता है, तो वैश्विक तेल बाज़ार में खासी उथल-पुथल मच सकती है, जहां पहले से ही काफी दबाव है, और वर्ष 2014 से अब तक 70 फीसदी की गिरावट झेल चुकीं कच्चे तेल की कीमतें इस वक्त 30 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो चुकी हैं।

तेल आपूर्ति को लेकर जारी बातचीत के बारे में गहरी जानकारी रखने वाले एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि दुनिया के चौथे सबसे बड़े तेल भंडार कहलाने वाले ईरान का इरादा कच्चे तेल के लिए भारत को अपना सबसे महत्वपूर्ण लक्ष्य बनाने का है। नाम न छापने की शर्त पर अधिकारी ने बताया, “भारत में कच्चे तेल की मांग अन्य एशियाई देशों की तुलना में ज़्यादा तेज़ी से बढ़ रही है… सो, अपने प्रतिद्वंद्वियों की तरह हम भी एशियाई बिक्री के लिए भारत को ही मुख्य लक्ष्य मान रहे हैं…”

अधिकारी ने बताया, ईरान को उम्मीद है कि पाबंदियों के दौरान वह भारत को जिस 260,000 बैरल प्रतिदिन का निर्यात करता है, उसमें प्रतिबंध हटने के बाद 200,000 बैरल प्रतिदिन तक की बढ़ोतरी कर पाएगा। ईरानी अधिकारी का कहना था कि चीन, दक्षिण कोरिया या जापान को निर्यात के बढ़ने की बहुत ज़्यादा उम्मीद नहीं है, क्योंकि वहां मांग लगातार घट रही है, और वैसे भी उनका झुकाव गैर-मध्यपूर्व देशों से कच्चा तेल खरीदने की तरफ है।

भारतीय रिफाइनरियां भी ईरान से आयात को उत्सुक
उधर, भारतीय रिफाइनरों का कहना है कि कीमत सही हुई, तो वे भी ईरान से ज़्यादा तेल का आयात करने के लिए उत्सुक हैं, क्योंकि भारत में कारों की बिक्री सालाना 10 फीसदी पर चीन से भी ज़्यादा तेज़़ रफ्तार से बढ़ रही है, जिससे तेल की मांग भी लगातार बढ़नी ही है।

भारत में एस्सार ऑयल के प्रबंध निदेशक एलके गुप्ता का कहना है, “ईरान से हमारे रिश्ते काफी पुराने हैं, और पाबंदियों के हटने के बाद हम हालात का मूल्यांकन करेंगे…” मैंगलोर रिफाइनरी एंड पेट्रोकैमिकल्स के प्रबंध निदेशक एच कुमार ने भी कहा, “पड़ोस के विकल्पों (जैसे ईरान) से तेल खरीदना समझदारी है… लेकिन यह कीमतों पर निर्भर करेगा…” साभार: NDTV


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