तुर्की के प्रधानमंत्री बिनाली यिलदरिम का कहना है कि तख़्तापलट की कोशिश को नाकाम कर दिया गया और इसके लिए ज़िम्मेदार लोगों के साथ ‘वो न्याय होगा जिसके वो हक़दार हैं’.

शुक्रवार की रात कई घंटों तक तुर्की के सैकड़ों सैनिकों ने राजधानी अंकारा और इस्तांबुल में महत्वपूर्ण जगहों पर क़ब्ज़ा किए रखा. घंटों तक ये साफ़ नहीं था कि राष्ट्रपति रेचेप तैयप अर्दोआन कहां हैं. ख़बरें मिली कि वो तुर्की के दक्षिणी पश्चिमी हिस्से में छुट्टी मना रहे हैं. लेकिन फिर अर्दोआन उड़कर इस्तांबुल पहुंच गए और उन्होंने एक प्रेस कांफ्रेस की. जैसे ही वो इस्तांबुल पहुंचे तो साफ़ हो गया कि हालात सरकार के नियंत्रण में है और उसे सेना के बड़े अफ़सरों का समर्थन प्राप्त है.

तख़्तापलट की कोशिश को कामयाब होने के लिए इसे पूरा सेना का समर्थन प्राप्त होना ज़रूरी है. ये सही है कि बड़ी संख्या में सैनिकों ने इसमें हिस्सा लिया. इस्तांबुल में बोसफोरस पुल पर नियंत्रण कर लिया गया.

लेकिन तुर्की की सेना के प्रमुख जनरल हुलुसी अकबर इस तख़्तापलट का हिस्सा नहीं थे और न ही इस्तांबुल में आर्मी के स्थानीय प्रमुख इसमें शामिल थे.

नौसेना प्रमुख और विशेष बल के कमांडर ने भी तख़्तापलट का विरोध किया है और एफ-16 विमानों ने विद्रोहियों के कुछ ठिकानों पर हमले किए. ब्रिटेन के एक थिंकटैंक चैटम हाउस से जुड़े फादी हकुरा का कहना है, “तख़्तापलट की ये कोशिश शुरू होने से पहले ही ध्वस्त होनी शुरू हो गई थी.”

वो मानते है कि इसे बचकाना तरीक़े से किया गया और ये सेना का व्यापक समर्थन हासिल करने में नाकाम रहा. राजनीतिक हल्कों से भी इसे कोई समर्थन नहीं मिला. विपक्षी धर्मनिरपेक्ष पार्टी सीएचपी ने कहा कि तुर्की में बहुत तख़्तापलट हो चुके हैं और वो अब नहीं चाहती कि ‘इन मुश्किलों को दोहाराया जाए’. राष्ट्रवादी एमएचपी भी सरकार के पीछे लामबंद है.

तो फिर ये तख़्तापलट करने वाले कौन थे? ये सेना में एक छोटे से समूह का काम है जिनका मुख्यालय इस्तांबुल में है. फादी हकुरा का कहना है, “वे सेना के व्यापक वर्ग का प्रतिनिधित्व नहीं करते हैं.” वो मानते हैं कि इस नाकाम कोशिश से पता चलता है कि अब तुर्की में तख़्तापलट के लिए कोई बड़ा समर्थन नहीं बचा है जैसा कि पहले कभी हुआ करता था.

राष्ट्रपति अर्दोआन काफ़ी समय से संभावित तख़्तापलट के ख़िलाफ़ चेतावनियां देते रहे हैं. हाल के सालों में उनकी सरकार ने सेना और पुलिस के अंदर ‘सफ़ाई अभियान’ चला कर ऐसे लोगों के ख़िलाफ़ क़दम उठाए हैं जिन पर इस्लामी रुझान वाली अर्दोआन की एके पार्टी के ख़िलाफ़ काम करने का संदेह था.

अर्दोआन बहुत समय से कहते रहे हैं कि अमरीका में रहने वाले फतहउल्लाह गुलेन उनके ख़िलाफ़ साज़िश रचते हैं. गुलेन कभी अर्दोआन के सहयोगी रहे हैं लेकिन अब वो निर्वासन में रह रहे हैं. (साभार: बीबीसी हिंदी)


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