भारत में धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा पर गंभीर चिंता जताते हुए 34 शीर्ष अमेरिकी सांसदों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक चिट्ठी लिखी है. इस पत्र में सांसदों ने मूल अधिकारों का संरक्षण करने के लिए फौरन कदम उठाने और इसका हनन करने वाले को न्याय के दायरे में लाने को कहा है.

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प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में इन सांसदों ने कहा है, ‘हम सरकार से यह सुनिश्चित करने के लिए फौरन कदम उठाने की मांग करते हैं कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के मूल अधिकारों का संरक्षण किया जाए और हिंसा करने वालों को जवाबदेह ठहराया जाए.’ इन सांसदों में आठ सीनेटर भी शामिल हैं.

जानकारी के मुताबिक, 25 फरवरी को लिखे पत्र में कहा गया है कि भारत के ईसाई, मुसलमान और सिख समुदायों से होने वाला बर्ताव विशेष चिंता की बात है. यह पत्र शनिवार को टॉम लंटोस मानवाधिकार आयोग ने प्रेस को जारी किया गया.

‘आरएसएस की गतिविधियों पर हो नियंत्रण’
सांसदों ने पत्र में कहा, ‘हम आपसे आरएसएस जैसे संगठनों की गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए कदम उठाने की मांग करते हैं. इसके साथ ही कानून का शासन लागू करने और धार्मिक रूप से प्रेरित उत्पीड़न और हिंसा से धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों का संरक्षण के लिए भारतीय सुरक्षा बलों को निर्देश देने की अपील करते हैं.’ पत्र में कहा गया है कि 17 जून 2014 को छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में 50 ग्राम परिषदों ने अपने समुदायों में सभी गैर हिंदू धार्मिक दुष्प्रचार, प्रार्थना और भाषण पर प्रतिबंध लगाने का एक प्रस्ताव स्वीकार किया था. उन्होंने कहा कि ईसाई अल्पसंख्यक समुदाय बुरी तरह से प्रभावित हुआ है.

गोमांस पर प्रतिबंध को लेकर जताई चिंता
सांसदों ने आरोप लगाया कि प्रतिबंध लागू होने पर बस्तर जिले में ईसाइयों पर बार बार हमले किए गए, सरकारी सेवाएं रोकी गई, वसूली की गई, जबरन निकालने की धमकी दी गई, भोजन पानी रोका गया और हिंदू धर्म स्वीकार करने के लिए दबाव डाला गया. भारत में गोमांस पर प्रतिबंध पर चिंता जताते हुए सांसदों ने कहा कि यह तनाव बढ़ा रहा है और मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा को बढ़ावा दे रहा. उन्होंने सिख समुदाय के विशिष्ट धर्म के रूप में पहचान नहीं होने पर भी चिंता जताई.

PM मोदी को याद दिलाया वादा
अमेरिकी कांग्रेस और सीनेट सदस्यों ने धार्मिक स्वतंत्रता और साम्प्रदायिक सौहार्द की सराहना की. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा फरवरी 2014 में किया गया वादा भी है कि आस्था की पूरी आजादी होगी और किसी भी धार्मिक समूह को अन्य के खिलाफ नफरत नहीं फैलाने दिया जाएगा. उन्होंने उनसे अपने वादे को कार्यरूप में तब्दील करने का अनुरोध किया. (Aaj Tak)


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