परमाणु हथियारों का बहाना कर इराक में सद्दाम हुसैन का तख्तापलट करने के बाद अमेरिका ने इराक के तेल क्षेत्र पर कब्ज़ा कर उसे कंगाल बना दिया. इसी तरह उसने लीबिया के शासक मुहम्मद गद्दाफी को तानाशाह घोषित कर पुरे देश को तबाह कर दिया, इसी तरह उस का निशाना सीरिया बना, जहाँ वो गैस भंडारों पर अपना कब्जा जमाना चाहता था.

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इसी बीच सीरिया और मध्य-पूर्व को छोड़ अचानक अमेरिका उत्तरी कोरिया के खिलाफ पीछे पड़ा हुआ है. उत्तरी कोरिया के पीछे पड़ने की वजह उसका न्यूक्लियर कार्यक्रम नहीं बल्कि उत्तरी कोरिया की जमीन में दबे हुए खनिज पदार्थ है. जिसे अमेरिका हथियाना चाहता है. एक अनुमान के मुताबिक यहां 200 से ज़्यादा बेशकीमती खनिज हैं.

इन 200 से ज़्यादा बेशकीमती मिनिरल्स की कीमत करीब 4,760 खरब रुपए है. अगर इस रकम को धरती पर रहने वाले हर इंसान के साथ बांटा जाए तो उसके खाते में 67 हजार रुपए आएंगे. अब ऐसे में सवाल उठता है कि ये जानकारी छुपी हुई क्यों थी.

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दरअसल नॉर्थ कोरिया के बारे में दुनिया सिर्फ उतना ही जानती है जितना अमेरिका बताना चाहता है. इस सच्चाई को हमेशा दुनिया से छिपा कर रखा गया कि उत्तर कोरिया की एक सच्चाई ये भी है. जो रातों रात उसकी दुनिया बदल सकती है.

ज़ाहिर है पैसों और तकनीक की कमीं की वजह से किम जोंग उन अपनी ही धरती पर गड़े इस सोने को बाहर निकाल नहीं पा रहा है. मगर उसे अपनी इस ताकत का अहसास है.

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