mya1

रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा और मानवाधिकार हनन के आरोपों के कारण म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा दांव पर लगी हुई हैं.

म्यांमार के अराकान से सैकड़ों की तादाद में बांग्लादेश की सीमा पर पहुँच रहे रोहिंग्या मुस्लिमों का आरोप हैं कि सुरक्षा बल मुस्लिम अल्पसंख्यकों पर अत्याचार कर रहे हैं. जिसके कारण वे देश छोड़ने को मजबूर हैं.

संकट आंग सान सू की सरकार के सामने ये गंभीर चुनोती हैं. जिसने पिछले साल सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय सुलह के वादा किया था. सोमवार को सु को अपने देश में रोहिंग्या मुस्लिमों के हो रहे खूनी दमन के खिलाफ इंडोनेशिया में हो रहे विरोध प्रदर्शन के कारण इंडोनेशिया की यात्रा स्थगित करने के लिए मजबूर होना पड़ा.

और पढ़े -   तुर्की-अरब संबंधों को बढ़ावा देने के लिए कुवैत में होगी 'तुर्की-अरब सांस्कृतिक संचार केंद्र' की स्थापना

संयुक्त राष्ट्र के विशेष सलाहकार Adama Dieng ने इस बारे में कहा कि इन आरोपों को तत्काल रूप से सत्यापित किया जाना चाहिए और म्यांमार सरकार को हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में जाने की अनुमति देनी चाहिए. उन्होंने कहा, रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा और मानवाधिकार हनन के आरोपों  के कारण म्यांमार की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा दांव पर हैं.

उन्होंने आगे कहा, म्यांमार को पूरी आबादी के मानव अधिकारों की सुरक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करने की जरूरत हैं. उन्होंने कहा म्यांमार से यह उम्मीद नहीं की जा सकती की वह इस तरह के गंभीर आरोपों को नजरअंदाज कर दे.

और पढ़े -   फिलिस्तीन - इस्राईली सैनिकों की गोलीबारी में 16 वर्षीय फ़िलिस्तीनी लड़का शहीद

उन्होंने कहा सरकार को एक बार फिर से म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों सहित अन्य धार्मिक और जातीय अल्पसंख्यकों की समस्या का अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार मानकों के अनुरूप समाधान निकालना चाहिए.


Urdu Matrimony - मुस्लिम परिवार में विवाह के लिए अच्छे खानदानी रिश्तें ढूंढे - फ्री रजिस्टर करें



Facebook Comment
loading...
कोहराम न्यूज़ की एंड्राइड ऐप इनस्टॉल करें

SHARE