संयुक्त राष्ट्र के प्रमुख एंटोनियो गुटरेस ने बुधवार को म्यांमार से रखाइन प्रांत में रोहिंग्याओं के खिलाफ अपना सैन्य अभियान बंद करने का आह्वान किया. इस दौरान उन्होंने रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ म्यांमार की कारवाई को जातीय सफाए की संज्ञा दी

उन्होंने कहा, ‘‘मैं म्यांमार प्रशासन से सैन्य गतिविधियां एवं हिंसा रोकने तथा कानून के शासन का पालन करने का आह्वान करता हूं.’’ उन्होंने कहा, मुस्लिम अल्पसंख्यक जातीय खात्मा का सामना कर रहे हैं.

जब उनसे पूछा गया कि क्या वह इस बात से सहमत हैं कि रोहिंग्या जाति का खात्मा किया जा रहा है, तो उन्होंने जवाब दिया, ‘‘जब रोहिंग्या जनसंख्या के एक तिहाई हिस्से को देश छोड़ना पड़े तो क्या आप इसके लिए इससे अच्छा शब्द ढूंढ सकते हैं?’’

ध्यान रहे म्यांमार में बहुसंख्यक बौद्ध आबादी के द्वारा रोहिंग्या मुस्लिमों को दशकों से भेदभाव और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, जहां देश में उनकी सदियों पुरानी जड़ों के बावजूद उन्हें नागरिकता से वंचित किया हुआ है.

25 अगस्त को मौजूदा संकट उभर आया था, जब एक बांग्लादेशी रोहिंगिया समूह ने म्यांमार के रखीन राज्य में पुलिस चौकियों पर हमला किया था, एक दर्जन से ज्यादा सुरक्षा कर्मियों ने मारे गए थे.

इससे म्यांमार की सेना ने विद्रोहियों के खिलाफ “निष्कासन कार्रवाई” शुरू करने को प्रेरित हुई, जिसने हिंसा की लहर की स्थापना की, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए, हजारों घरों को जलाया गया और जिसकी वजह से लाखो लोग बांग्लादेश पलायन कर गए.


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