अमरीकी कांग्रेस की प्रतिनिधि तुलसी गैबार्ड ने एक आश्चर्य जनत बयान में शुक्रवार के दिन एक बार फिर सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद का समर्थन किया, उन्होंने बशार असद और हैदर अलएबादी को आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में सबसे सच्चा व्यक्ति बताया है।

हवाई प्रांत की डेमोक्रेटिक प्रतिनिधि ने सीएनएन को दिए साक्षात्कार में सीरिया में सरकार बदलने के बारे में अमरीकी राजनीतिक की निंदा की और कहा कि मीडिया द्वारा मध्य पूर्व संकट की जो रिपोर्ट दिखाई जाती है उस पर मुझे आश्चर्य होता है। उन्होंने कहा कि सीरिया में नरम रुख़ वाले विद्रोहियों का कोई अस्तित्व नहीं है, बल्कि अलनुस्रा, अलक़ायदा, अहरारुल शाम और दाइश नाम के आतंकवादी संगठन है जिनका अमरीका या उसके सहयोगियों जैसे सऊदी अरब, तुर्की, और क़तर द्वारा समर्थ किया जा रहा है ताकि सीरिया के राष्ट्रपति को सत्ता से बेदख़ल किया जा सके।

उन्होंने कहाः मेरा मानना है कि आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई में इस समय सबसे सच्चे लोग इराक़ के प्रधानमंत्री हैदर अलएबादी और सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद हैं, और हमको आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई और दाइश व अलनुस्रा फ़्रंट से मुक़ाबले में रूस के राष्ट्रपति पुतिन के समर्थन और सहयोग को भी अनदेखा नहीं करना चाहिए। अमरीका आतंकवादियों के बीच अंतर करता है, और उनको अच्छे और बुरे आतंकवादियों में बांटता है।

इस अमरीकी सांसद ने जनवरी में सीरिया और लेबनान की सात दिन की यात्रा की थी जिसमें वह बहुत विस्थापित हो चुके सीरियन, सरकार विरोधियों के नेताओं, बेवा औरतों, और उन सीरियन परिवारों से मुलाक़ात की थी जो अलक़ायदा की तरफ़ से या फ़िर सरकार की तरफ़ से लड़ रहे थे, उन्होंने युद्ध ग्रस्त हलब के कुछ ईसाई धर्मगुरुओं से भी मुलाक़ात और बातचीत की थी।

तुलसी ने सीरिया के राष्ट्रपति बशार असद से भी एक गोपनीय मुलाक़ात की थी जिस पर उनकी बहुत निंदा की गई थी, उन्होंने सरकार बदलने की राजनीतिक को “उलटे परिणाम” वाली राजनीति बताया और कहा कि इस प्रकार की राजनीति अमरीकी हितों और सीरियन लोगों के हितों को कोई लाभ नहीं पहुँचाएगी।

उन्होंने यात्रा से वापस आने के बाद अपने कार्य का बचाव किया और कहाः “पहले मेरा बशार असद से मुलाक़ात का कोई इरादा नहीं था लेकिन जब यह मौक़ा मिला तो मैंने सोच कि मुझे इस मौक़े का फ़ायदा उठाना चाहिए, मैंने सोचा कि अगर सीरियन लोगों पर मुसीबत के पहाड़ तोड़ देने वाले इस युद्ध को समाप्त करने का कोई रास्ता निकल आए तो हमको किसी भी व्यक्ति से मुलाक़ात के लिए तैयार रहना चाहिए।”

उन्होंने कहाः “जब मैं सीरिया में लोगों से मिलती तो उनकी दुख भरी कहानी सुनती और सुनती की किस प्रकार इस युद्ध ने उनके जीवन के नर्क बना दिया है, वह मुझ से प्रश्न करतेः क्यों अमरीकी और उसको सहयोगी अलक़ायदा और दूसरे आतंकवादियों की सहायता कर रहे हैं कि वह सीरिया पर क़ब्ज़ा कर लें?” मेरे पास उनके प्रश्न का कोई उत्तर न था।

कुछ समय के बाद फ़रवरी में आतंकवादियों को हथियार सप्लाई रोके जाने का क़ानून अमरीकी सीनेट में तुलसी गैबार्ड और रैंड पॉल के माध्यम से पेश किया गया, इस दो खंडीय योजना के अनुसार कोई भी फेडरल संगठन टैक्स डॉलर से अलक़ायदा, दाइश और दूसरे आतंकवादी संगठनों को हाथियार और जानकारी की सहायता नहीं दे सकेगा और सरकार को भी दूसरे देशों की सहायता से आतंकवादियों के लिए धन और हथियार उप्लब्ध कराने का अधिकार न होगा।

तुलसी गैबार्ड ने अगरचे इराक़ के युद्ध में भाग लिया था लेकिन वह व्यक्तिगत रूप से इराक़ पर क़ब्ज़ा किए जाने के विरुद्ध थीं। उन्होंने 2012 के अंत में कहा थाः “मैं इराक़ युद्ध के विरुद्ध थी, हमको वहां नहीं जाना चाहिए था।” उनका मानना है कि इराक़ में अमरीकी जीत की शर्तों की स्पष्ट व्याख्या नहीं की गई थी। 2014 में उन्होंने अमरीका द्वारा इराक़ में सैन्य हस्तक्षेप के विरुद्ध वोट दिया था।


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