पुरे इस्लामिक जगत में कट्टरपंथ और चरमपंथ को बढ़ावा दे रही तकफीरी विचारधारा को फैलाने में पश्चिम पर आरोप लगते रहे है. लेकिन अब इंग्लैंड के पूर्व प्रधानमंत्री टोनी ब्लेयर ने इस बात को स्वीकार किया है.

उन्होंने कहा कि कि इस्लामिक शरीअत से ब्रिटेन को दो दशकों से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. ईरान धार्मिक सरकार के विचार को आम कर रहा है, और मिस्र में मुस्लिम ब्रदरहुड की भी ऐसी ही सोच है लेकिन उन्हें दबाने के बाद मिस्र में उन्हें एक किनारे कर दिया गया है.

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उन्होंने कहा ऐसे में हमने तय किया था कि इस्लाम से मुकाबले के लिए एक सोच विकसित की जाए ताकि इस्लाम फैलने से रोका जा सके और वहाबियत एक चरमपंथी विचारधारा है जिससे मुसलमानों के बीच मतभेद और फसाद फैलाया जा सकता है.

उन्होंने अंत में कहा, इंग्लैंड सरकार, मुस्लिम ब्रदरहुड जैसी सोच जो मुसलमानों की सरकार और राजनीति के बारे में है के प्रति सावधान रहे.

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