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वॉशिंगटन। अमेरिका ने कहा है कि भारत सरकार जब कभी धर्म के नाम पर हिंसा और अतिउत्साही गौरक्षकों संबंधी मामलों पर कार्रवाई करने में ‘धीमी’ रही है, उसने अपनी चिंताएं स्पष्ट रूप से जाहिर की हैं।

धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश विभाग की एक रिपोर्ट में आज कहा गया है कि साल 2015 में भारत में धर्म से प्रेरित हत्याएं, हमले, जबरन धर्म परिवर्तन, दंगे और धार्मिक आस्थाएं बदलने के लिए व्यक्ति के अधिकारों पर पाबंदी लगाने जैसी चीजें देखी गईं।

साल 2015 के लिए अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर विदेश विभाग की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक अल्पसंख्यक धार्मिक संगठनों ने सरकार के भेदभाव और सरकारी स्कूलों में हिंदुत्व की शिक्षा देने संबंधी सरकारी अधिकारियों के सुझावों को लेकर चिंता जाहिर की। केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर सरकारी अधिकारियों ने धार्मिक अल्पसंख्यक समूहों के खिलाफ अपमानजनक बयान दिए।

रिपोर्ट के मुताबिक हमलावरों ने अक्सर खुली छूट के साथ हरकतें की और कुछ पीड़ितों के मुताबिक पुलिस ने आपराधिक शिकायतें दर्ज करने का प्रतिरोध किया तथा कई मामलों में पीड़ितों को फंसाने की धमकी दी गई। विदेश विभाग ने कहा कि धार्मिक संगठनों ने हिंदुत्व की शिक्षा स्कूलों में दिए जाने संबंधी कुछ सरकारी अधिकारियों के बयानों के बारे में चिंता जाहिर की।

रिपोर्ट के मुताबिक धर्म से प्रेरित हत्याएं, हमले, जबरन धर्म परिवर्तन, दंगे और धार्मिक मान्यताएं बदलने के लिए व्यक्ति के अधिकारों पर पाबंदी लगाने जैसी चीजें देखी गईं।


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