टाटा स्टील ब्रिटेन के अपने स्टील बनाने वाले व्यापार को बेचना चाहता है। ऐसे में कभी ब्रिटेन में अपना प्रभुत्व बनाने वाले उद्योग में हजारों नौकरियां खतरे में पड़ गई हैं। जो गिरती कीमतो और बढ़ती लागत के साथ चीन से प्रतियोगिता के चलते नीचे आ रहा है। गौरतलब है, कॉरस का अधिग्रहण करने के बाद से पिछले नौ साल से टाटा स्टील यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी स्टील निर्माता कंपनी बनी हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में हुई मैराथन बोर्ड की बैठक के बाद टाटा ने कहा है कि यह ब्रिटेन की स्टील इंडस्ट्री में अपने एक दशक पुराने धावे को सीमित करेगा। यह ब्रिटेन से पूरी तरह बाहर आ रहा है। वित्तीय अस्थिरता के बीच टाटा स्टील के पूरे यूके से कारोबार बेचने की घोषणा के बाद ब्रिटेन की सरकार तक सकते में आ गई है। प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने आज इस मामले पर चर्चा के लिए आपात बैठक बुलाई है।

गौरतलब है, ब्रिटेन से टाटा के चले जाने से बड़ी संख्या में वहां लोग बेरोजगार हो जाएंगे इसका असर दूसरे कारोबार पर भी पड़ सकता है। बुधवार को मुंबई में टाटा समूह की बोर्ड मीटिंग में ब्रिटेन से अपना पूरा कारोबार बेचने की घोषणा की। इस खबर के बाद ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति पर फिर से चर्चा होने लगी है। इसका एक अहम कारण है जून में ही देश में होने वाला जनमत संग्रह। जो इस बात के लिए कराया जाएगा कि ब्रिटेन को यूरोपीय यूनियन में रहना चाहिए कि नहीं?

टाटा स्टील की स्थिति

टाटा स्टील पिछले कई सालों से 14 बिलियन डॉलर में कोरस कंपनी का अधिग्रहण करने के बाद यूरोप की दूसरे सबसे बड़ी कंपनी बनी हुई है। पिछले 12 महीनों से कंपनी की वित्तीय स्थिति काफी खराब चल रही है। टाटा स्टील के कारण ब्रिटेन में वर्तमान में 15000 से ज्यादा लोगों को नौकरी मिली हुई है।

बीच में ही छुट्टी से लौटे कैमरून

टाटा स्टील की घोषणा के बाद ब्रिटेन में एक संकट की स्थिति सी बनती दिख रही है। स्थानीय अखबार ‘टेलीग्राफ’ के मुताबिक प्रधानमंत्री डेविड कैमरून ने अपनी पारिवारिक छुट्टी बीच में ही छोड़ने का फैसला किया है और एक आपात बैठक बुलाई है। उनका मकसद टाटा को कारोबार बेचने से रोका जाए ताकि हजारों नौकरी का संकट देश में न खड़ा हो। कारोबार मंत्री अन्ना सोबरी ने कहा, सरकार इस मामले में हर तरह के विकल्प की तलाश में है, ताकि खरीदारों को समय मिले और हजारों नौकरियों का संकट टाला जा सके।

कैमरून सरकार के सामने मजबूरी

कैमरून से इस बारे में एक कार्यक्रम में सवाल किया गया। जब उनसे पूछा गया कि क्या सरकार टाटा के बचे हुए स्टील प्लांट को राष्ट्रीयकृत घोषित करेगी? इसके जबाब में उन्होंने कहा, “सरकार के सामने भी कुछ मजबूरियां हैं। हम एक हद तक ही चीजें कर सकते हैं। फिर भी हम वो सभी कुछ करेंगे जो कर सकते होंगे ताकि लोगों की नौकरियों को बचाया जा सके।” (News24)


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