अमेरिका की और से लगातार क़तर पर आतंकवादियों की मदद करने के आरोप लगाये जा रहे है. जिसके चलते सऊदी अरब, यमन, मिस्र और यूएई सहित कई देशों ने क़तर के साथ अपने रिश्तें तोड़ लिए है. इस सबंध में क़तर ने बड़ा खुलासा किया है.

क़तरी विदेश मंत्री के वरिष्ठ सलाहकार मुतलक़ अलक़हतानी ने कहा है कि अमरीका के निवेदन पर तालेबान की मेज़बानी की गई थी. और यह वार्ता व मध्यस्थता के ज़रिए शांति लाने की क़तर की खुली नीति के तहत था. याद रहे तालेबान ने 2013 में क़तर में राजनैतिक कार्यालय खोला था जिसे बाद में क़तरी सरकार ने बंद कर दिया.

वहीँ दूसरी और अरब संघ ने क़तर से अरब देशों के संबन्ध तोड़ लेने के बारे में चर्चा इनकार कर दिया है. अरब संघ ने घोषणा की है कि उसकी बैठक में कुछ देशों द्वारा क़तर से संबन्ध विच्छेद करने के बारे में वार्ता नहीं की जायेगी. महमूद अफ़ीफ़ी ने कहा कि यह बात वास्तविकता से बहुत दूर है कि अरब संघ की बैठक में क़तर तथा कुछ अरब देशों के हालिया मतभेदों के बारे में चर्चा की जाए.

उन्होंने कहा, अरब संघ के प्रतिनिधि, फ़िलिस्तीन की मांग पर बैठक कर रहे हैं जिसमें ज़ायोनी शासन के बढ़ते प्रभाव के बारे में चर्चा होगी.


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