बेरुत। सीरिया में पांच साल से जारी हिंसा के कारण करीब 24 लाख बच्चे बेघर हुए हैं। बड़ी संख्या में बच्चे आतंकी संगठनों से भी जुड़े हैं। ऐसे कुछ बच्चों की उम्र तो महज सात साल ही है। लड़ाई की यह दर्दनाक तस्वीर यूनिसेफ ने पेश की है। सीरिया में शांति को लेकर सोमवार को जेनेवा में बातचीत शुरू होने से पहले संगठन ने यह रिपोर्ट जारी की। 27 फरवरी से लागू तात्कालिक युद्धविराम को अंजाम तक पहुंचाने के लिए यह वार्ता शुरू हुई है। हालांकि संकट के समाधान पर सभी पक्षों के मतभेद पहले की तरह बरकरार हैं

नो प्लेस फॉर चिल्ड्रेन नामक रिपोर्ट में बताया गया है कि सीरिया और आसपास के देशों में 80 लाख से ज्यादा बच्चों को तत्काल मानवीय मदद पहुंचाने की जरूरत है। इनमे से करीब दो लाख बच्चे सीरिया के ऐसे इलाकों में रहते हैं जहां पहुंचना मुनासिब नहीं है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार साढ़े चार लाख से ज्यादा लोग ऐसे इलाकों में रह रहे हैं जिनकी सेना ने महीनों से घेराबंदी कर रखी है। इस हालात का फायदा आतंकी संगठन उठाने में जुटे हैं। बच्चों के बाल आतंकी बनने का चलन बढ़ता जा रहा है। बाल आतंकियों को चार सौ डॉलर (करीब 27 हजार रुपये) प्रतिमाह वेतन सहित अन्य उपहार दिए जाते हैं।

रिपोर्ट के अनुसार डेढ़ लाख से ज्यादा सीरियाई बच्चे शरणार्थी के तौर पर पैदा हुए हैं। करीब 70 हजार बच्चे अकेले लेबनान के शिविरों में पैदा हुए हैं। करीब 28 लाख बच्चे स्कूलों से दूर हैं। ये बच्चे सीरिया के अलावा पड़ोसी देशों के शिविरों में भी रह रहे हैं।

161 रासायनिक हमले

सीरिया में 2015 के अंत तक 161 बार रासायनिक हमले किए गए थे। इनमें से 69 बीते साल किए गए। इन हमलों में 491 मौतें हुई और 14,581 लोग जख्मी हुए हैं। अमेरिकी गैर सरकारी संगठन सीरियन अमेरिकी मेडिकल सोसायटी ने अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है। यह संगठन सीरिया में इस समय करीब सौ स्वास्थ्य केंद्रों के संचालन में मदद कर रहा है। गौरतलब है कि सीरिया में हिंसा के कारण अब तक दो लाख 70 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी है।

अमेरिका के साथ सहयोग के लिए रूस तैयार

रक्का से आइएस आतंकियों को खदेड़ने के अभियान में अमेरिकी नेतृत्व वाले गठबंधन के साथ सहयोग करने को लेकर रूस तैयार है। संवाद समिति इंटरफैक्स ने रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के हवाले से यह बात कही है। लावरोव ने बताया कि रक्का सीरिया के पूर्वी हिस्से में है जहां अमेरिकी गठबंधन की ज्यादातर गतिविधियां केंद्रित हैं। ऐसे में रूस की मदद से गठबंधन को इस शहर पर अपना ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने बताया कि रूसी वायुसेना पल्माइरा को आतंकी कब्जे से मुक्त कराने के लिए अभियान शुरू करना चाहती है। उल्लेखनीय है कि रक्का आईएस की स्वयंभू खिलाफत की राजधानी है (नईदुनिया)

 


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