अमरीका के पीव रिसर्च सेन्टर ने मुसलमानों की भारी जनसंख्या वाले दुनिया के दस देशों में एक सर्वे के बाद एक दिलचस्प रिपोर्ट प्रकाशित की है। अमरीका के पीव रिसर्च सेन्टर ने दस इस्लामी देशों में दस हज़ार लोगों से एक प्रश्न पूछ कर यह सर्वे किया है। यह सर्वे मलेशिया, तुर्की, पाकिस्तान, जार्डन, नाइजेरिया, फिलिस्तीन, सेनगल, लेबनान, इंडोनेशिया और बोरकीनाफासो में किया गया।

प्रश्न यह था कि क्या आप यह चाहते हैं कि आप के देश में शरीआ क़ानून लागू हो?

सर्वे के परिणाम के अनुसार सब से अधिक पाकिस्तान के लोग अपने देश में इस्लामी कानून लागू किये जाने के इच्छुक हैं। 78 प्रतिशत पाकिस्तानी नागरिकों का मानना है कि उनके देश में क़ानून इस्लामी नियमों के अनुसार बने जबकि तुर्की में 13 प्रतिशत फिलिस्तीन में सन 2011 में 36 प्रतिशत जो सन 2015 में बढ़कर 65 प्रतिशत हो गया, जार्डन में 18 प्रतिशत की कमी के साथ 54 प्रतिशत लोगों का मानना है कि उनके देश में इस्लामी नियम लागू होना चाहिए। इस से पहले किये गये सर्वे में जार्डन के 72 प्रतिशत लोगों का यह मानना था।

पीव रिसर्च सेन्टर के सर्वे के अनुसार नाइजेरिया जैसे देश में जहां मुस्लिम और गैर मुस्लिम की आबादी लगभग बराबर है, 52 प्रतिशत मुसलमानों का मानना है कि उनके देश में इस्लामी नियम लागू होना चाहिए जबकि इस देश के केवल 2 प्रतिशत ईसाइयों का यह मानना है कि उनके देश में इस्लामी नियम लागू होना चाहिए।

पीव रिसर्च सेन्टर के सर्वे के अनुसार नाइजेरिया, तुर्की, बोरकीनाफासो, इंडोनेशिया, लेबनान और सेनेगल में कम पढ़े लिखे लोगों ने इस्लामी नियम लागू करने का अधिक समर्थन किया है। लेबनान और तुर्की में युवाओं ने, इस विचार का समर्थन, बूढ़े लोगों के मुकाबले में कम किया है।

सर्वे के अनुसार अपने देश में इस्लामी नियम का समर्थन करने वालों का प्रतिशत इस प्रकार हैः

पाकिस्तान (78) फिलिस्तीन (65) जार्डन (54) मलेशिया (52) सेनेगल (49) नाइजेरिया (27) इंडोनेशिया (22) लेबनान (15) तुर्की (13) बोरकीनाफासो (9)


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