कोलंबो – अभी भारत और चीन के बीच तनातनी लगातार जारी है वहीँ चीनी राष्ट्रपति ने सेना को संबोधित करते हुए कहा की उन्हें युद्ध के लिए तैयार रहना चाहिए, इसके बाद चीन से सम्बंधित एक और बड़ी खबर श्रीलंका से आ रही है जहाँ श्रीलंका ने रणनीतिक रूप से महत्वूपर्ण अपने हमबनतोता बंदरगाह में 70 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने के लिए चीन के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। यह सौदा 1.1 अरब डालर का है। इस बंदरगाह को बनाने में भारी कर्ज बोझ को देखते हुये यह समझौता किया गया। गहरे समुद्र स्थित इस बंदरगाह का इस्तेमाल चीन की नौसेना द्वारा किए जाने को लेकर बढी चिंताओं के बीच यह सौदा कई महीने से टलता आ रहा था।

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कहा जा रहा है कि श्रीलंका इस पैसे का इस्तेमाल विदेशी कर्ज चुकाने के लिए करेगा. हालांकि श्रीलंका में चीनी सेना की दखल को लेकर लोगों की चिंताएं और उग्र प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं. हिंद महासगार में चीन की यह मौजूदगी भारत के लिए भी चिंता की बात मानी जा रही है

उल्लेखनीय है कि चीन ने 2009 में गृहयुद्ध समाप्त होने के बाद से श्रीलंका में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। इस सौदे के तहत इस बंदरगाह में हिस्सेदारी चीन की सरकारी कंपनी चाइना मर्चेंट पोर्ट होल्डिंग्स को बेची गई है। इस अवसर पर श्रीलंका के बंदरगाह मंत्री महिंदा समरसिंघे व चीन के राजदूत यी शियानलियांग मौजूद थे।

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इस समझौते से पहले श्रीलंका के लिए सबसे बड़ी चिंता थी कि इस पोर्ट का इस्तेमाल चीनी सेना कर सकती है. हालांकि डील में चीन ने यह साफ किया है कि पोर्ट का इस्तेमाल केवल व्यावसायिक इस्तेमाल के लिए किया जाएगा और इस पर सेना का कोई दखल नहीं होगा. पोर्ट के निर्माण के दौरान चीन ने ऑफर किया था कि पोर्ट की सुरक्षा के लिए वह अपनी सेना का बेस यहां लगाएगा, लेकिन लंका सरकार ने इसकी अनुमति नहीं दी थी. पोर्ट की ज्यादातर हिस्सेदारी चीन के पास होने के बावजूद इसकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी श्रीलंकाई नौसेना की होगी. चीन द्वारा भारत की घेराबंदी की कोशिशों की खबरों के बीच भारत के लिए यह खबर राहत देने वाली हो सकती है.

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