कजाखस्तान की राजधानी अस्ताना में विज्ञान और प्रौद्योगिकी के लिए दो दिवसीय शिखर सम्मेलन के रुप में इस्लामी सहयोग संगठन (ओआईसी) ने रोहिंग्या मुस्लिम संकट पर विशेष बैठक बुलाई.

राष्ट्रपति ममून हुसैन पहले ही कजाख राजधानी अस्ताना में चार दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर पहुंचे थे.बर्मा सेनाओं द्वारा रोहिंग्या मुसलमानों के नरसंहार पर चर्चा करने के लिए ओआईसी से जुड़े वैश्विक नेताओं की एक विशेष बैठक का आयोजन शहर में किया गया है.

तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तय्यिप एर्दोगान की अध्यक्षता वाले इस सत्र में बांग्लादेश में 3000000 से अधिक रोहंग्या की बढ़ोतरी के बारे में भी चर्चा करेंगे. इस दौरान पड़ोसी बांग्लादेश में विस्थापित रोहिंग्याओ में वृद्धि के बीच इन निराश लोगों के खिलाफ सकल मानव अधिकारों के उल्लंघन के संबंध में एक एकीकृत इस्लामी स्थिति बनने की उम्मीद है.

रेडियो पाकिस्तान के मुताबिक, ह्यूमन राइट्स वॉच ने संयुक्त राष्ट्र (संयुक्त राष्ट्र) सुरक्षा परिषद से म्यांमार के रोहंग्या मुसलमानों पर कार्रवाई के लिए एक आपात बैठक आयोजित करने की मांग की.

ह्यूमन राइट्स वॉच के निदेशक दक्षिण एशिया मीनाक्षी गांगुली ने कहा कि बर्मी सेना के हमलों से और दुर्व्यवहार से रोहिंगिया शरणार्थियों को भागने के लिए मजबूर होना पड़ा. उनके गांवों को नष्ट कर दिया गया है.

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र और संबंधित सरकारों को अब म्यांमार को रोहिंग्या के खिलाफ इन भयावह अत्याचारों को खत्म करने की आवश्यकता है.

संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, कम से कम 300,000 रोहिंग्या राखीन राज्य से बांग्लादेश पहुँच चुके है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि यह बांग्लादेश में आने वाले हजारों लोगों की संख्या में अधिक वृद्धि करने के लिए मजबूर किया गया.


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