भूख-प्यास से बेपरवाह अपनी जान बचाकर म्यांमार से भाग कर बांग्लादेश आ रहे रोहिंग्या मुस्लिमों की मदद को सिख समुदाय आगे आया है. सिख समुदाय ने रोहिंग्याओ के लिए बांग्लादेश-म्यामांर बॉर्डर पर लंगर शुरू किया है.

खालसा एड के मैनेजिंग डायरेक्टर अमरप्रीत सिंह ने बताया कि पहले दिन लंगर के लिए वे 50000 लोगों के लिए खाद्य सामग्री लेकर आए थे. लेकिन 200000 से ज्यादा लोग भूखे-प्यासे थे. उन्होंने कहा कि हमारी कोशिश है कि इन लोगों की कुछ मदद की जा सके, उनको सिर ढकने की सुविधा दी जा सके.

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सिंह ने कहा कि हम अपनी तरफ से लोगों की मदद की कोशिश करेंगे. उन्होंने बताया कि हमारी टीम शर्णार्थियों को लंगर और पानी की व्यवस्था शुरू की है. उन्होंने कहा कि टेकनफ कस्बा (जहां रोहिंग्या शरणार्थी कैंप में रह रहे हैं) बांग्लादेश की राजधानी ढाका से 10 घंटे की दूरी पर है, ऐसे में हम ढाका से खाने-पीने का सामान ला सकते हैं, हालांकि बारिश एक बड़ी समस्या बन रही है.

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दल के एक दूसरे सदस्य जीवनजोत सिंह ने कहा कि दस दिनों तक पैदल चलकर ये लोग म्यांमार से यहां पहुंचे हैं, इनकी हालत बहुत खराब है. इन लोगों को खाना-पानी और रहने की जगह देने के लिए हम यहां पहुंचे हैं.  उन्होंने बताया कि खालसा की एक और टीम बहुत जल्दी ही टेनकफ पहुंचेगी और रोहिंग्याओं की मदद के लिए जुटेगी ताकि सभी की मदद की जा सके.

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