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ईरान के राष्ट्रपति ने गुरुवार की शाम संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा के अधिवेशन में आतंकवाद को लेकर पश्चिमी देशों की नीतियों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि हिंसक व कट्टरपंथी आतंकवादी का फैलाव, पिछले 15 वर्षों में बड़ी ताक़तों की सुरक्षा नीतियों का परिणाम है.

उन्होंने आगे कहा आतंकवादी, सीरिया, इराक़ और लीबिया में सरकार के गठन का दावा करने के साथ कट्टरपंथी व तकफीरी विचारों का प्रचार कर उन्होंने कृपा व प्रेम वाले इस्लाम धर्म को आतंक व हिंसा का साधन बना दिया है. जिसकी वजह से आज मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में हिंसा आश्चर्यजनक तेज़ी से फैल रही है और पूरे इलाक़े को अभूतपूर्व हिंसा ने अपने चपेट में ले लिया है.

राष्ट्रपति रूहानी ने जोर देकर कहा कि निश्चित रूप से अगर हम इस खतरनाक प्रक्रिया को रोकना चाहें और क्षेत्र को विकास और शांति की डगर पर लगाना चाहें तो इलाक़े के कुछ देशों को अपने पड़ोसियों पर बमबारी और तकफीरी आतंकवादियों का समर्थन रोकना पड़ेगा.

उन्होंने सऊदी अरब की नीतियों को लेकर कहा कि सऊदी अरब की सरकार को अगर अपनी तरक़्क़ी और इलाक़े की सुरक्षा है तो उसे फूट डालने की अपनी नीतियों, और पड़ोसियों पर हमले की राजनीति को छोड़ना होगा. उन्होंने आगे कहा ईरान का यह मानना है कि शिया सुन्नी मुसलमान सदियों से परस्पर सम्मान और एकजुटता के साथ रहते आए हैं और इसी तरह रहेंगे.


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