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सऊदी अरब में हत्या के जुर्म में शाही खानदान के सदस्य को बिना कोई भेदभाव किये फांसी की सजा दिए जाने पर एक बार फिर से शरीअत के कानूनों पर बहस शुरू हो चुकी हैं. इससे पहले हमेशा सऊदी अरब की शरीअत के कानूनों को लेकर आलोचना की जाती रही हैं.

तीन साल पहले राजधानी रियाद में एक व्यक्ति की हत्या करने के मामले में प्रिंस तुर्की बिन सऊद अल कबीर को मौत की सजा दी गई. प्रिंस ने सऊदी नागरिक आदिल अल-मोहम्मद की गोली मारकर हत्या कर दी थी. आदिल अल-मोहम्मद परिवार के लोगों ने प्रिंस को माफ़ करने से इनकार कर दिया था. जिसके बाद प्रिंस को मौत की सजा दी गई.  प्रिंस 134वें अपराधी थे जिन्हें इस साल मौत की सजा दी गई.

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अल-अरबिया के मुताबिक़ पीड़ित के परिवार ने ‘ब्लड मनी’ लेने से इनकार कर दिया था. इस प्रावधान के तहत ऐसे मामलों में परिवार वाले आर्थिक मुआवज़ा स्वीकार करें तो दोषी छूट सकता है.

मौत की सजा का सऊदी अरब में ऑनलाइन मीडिया में स्वागत किया गया. शाही परिवार के सदस्यों ने प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि बादशाह सलमान निष्पक्ष न्याय देते रहे हैं.शाही परिवार से ताल्लुक रखने वाले खालिद अल-सउद ने ट्विटर पर लिखा, “यह ईश्वर का न्याय है और यह हमारे प्यारे देश का दृष्टिकोण है.

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