सऊदी अरब में ‘कानून के सिद्धांत और कुरान के आधार पर फैसला’ नामक किताब के प्रकाशित होने के बाद एक नया विवाद शुरू हो गया है। इस संबंध में एक सऊदी न्यायाधीश ने कहा कि आले सऊद के शासन में ‘कानून के सिद्धांत’ किताब का प्रकाशन एक बेवफाई और कुफ्र से कम नहीं है।

Saudi High court in Riyadh

उन्होंने ‘मलिक सऊद’ विश्वविद्यालय को काफ़िर विश्वविद्यालय घोषित किया। सऊदी उपयोगकर्ताओं में सामाजिक वेबसाइटों पर ‘मआज़ बिन अब्दुलअजीज अलमबरद’ की लिखी हुई उक्त किताब पर खूब गर्मागर्म बहस जारी है।

उक्त लेखक ने पुस्तक में विश्वविद्यालयों में शिक्षण से संबंधित कुछ नियमों को गैरइस्लामी और कुरान की शिक्षाओं के विरुद्ध करार देते हुए उन्हें मुशरिकाना (पथभ्रष्ट) प्रक्रिया बताया और विश्वविद्यालय में नौकरी करने वाले लोगों को पाखंडी कहा है। (hindkhabar.in)


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