सऊदी अरब सहित यमन, सीरिया, यूएई, बहरीन और मिस्र द्वारा क़तर से रिश्तें तोड़े जाने का असर सबसे ज्यादा फिलिस्तीन पर पढ़ सकता है. दरअसल, क़तर की और से फिलिस्तीन में मदद के लिए कई प्रोजेक्ट चल रहे है. जिनमे ग़ज़ा शहर में बनने वाली हाउसिंग कॉलोनी प्रमुख है.

क़तर अब तक ग़ज़ा पट्टी में नए घरों, अस्पतालों और सड़कों के निर्माण में करोड़ों डॉलर खर्च कर चूका हैं. इसके अलावा एक अरब डॉलर और लगाने वाला है. ऐसे में प्रतिबंध लगने के कारण क़तर से आने वाली फिलिस्तीनियों की मदद रुक सकती है.

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याद रहे दुनिया में बेरोज़गारी के आंकड़ों के लिहाज से गज़ा की हालत कहीं खराब है. और ऐसे में सऊदी अरब की एक मांग ये भी है कि क़तर हमास को मदद देना बंद करे. वर्तमान में गज़ा का नियंत्रण हमास के पास ही है.

बीबीसी के अनुसार, हमास के वरिष्ठ नेता महमूद ज़हर कहते हैं, “क़तर जो घर बना रहा है, वो हमास के लिए नहीं है. जो सड़के बनाई जा रही हैं, वो हमास के लिए नहीं है. वे जो अस्पताल और स्कूल बना रहे हैं, वो फलीस्तीन के लोगों के लिए हैं. हमास और क़तर के बीच मुश्किलें पैदा करने की कोशिशें पूरी तरहे बेमानी और गलत हैं.

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गज़ा पर हमास के नियंत्रण के बाद यहां आने वाले किसी राष्ट्राध्यक्ष में केवल क़तर के अमीर ही हैं. हमास के कई निर्वासित नेताओं को क़तर ने अपने यहां पनाह के साथ-साथ ऐशोआराम की जिंदगी उपलब्ध कराई. इनमें हमास के पूर्व चीफ खालिद मेशाल भी हैं.

अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और हिज्बुल्लाह के साथ-साथ हमास भी क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है.

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