म्यांमार की सरकार ने रोहिंग्या मुस्लिमों के खिलाफ सुरक्षा बलों द्वारा हत्या, बलात्कार और यातनाओं की जांच के लिए स्थापित संयुक्त राष्ट्र मिशन के कर्मचारियों के लिए वीजा जारी करने से मना कर दिया है।

जिनेवा में ह्यूमन राईट वाच के प्रतिनिधि जॉन फिशर ने बुधवार को एक बयान में कहा, “म्यांमार का ये कदम राज्य सुरक्षा बलों द्वारा गंभीर मानवाधिकारों का उल्लंघन करने वाले पीड़ितों के चेहरे पर एक थप्पड़ है।
उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा, “क्या आंग सान सू की सरकार वास्तव में उन देशों के एक बहुत छोटे और हताश क्लब में शामिल होना चाहती है जो मानवाधिकार परिषद के फैसले को अस्वीकार करते हैं?”
गौरतलब रहें कि म्यांमार सेना और पुलिस पर बहुसंख्यक बौद्धों और बाहरी लोगों के साथ मिलकर रोहंग्या मुसलमानों की हत्या करने और बलात्कार का आरोप है।
पिछले महीने, संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त ज़ैद बिन राद अल हुसैन ने म्यांमार में महीने भर चलने वाली रोहिंग्या के खिलाफ कार्रवाई की एक अंतरराष्ट्रीय जांच की मांग की थी।
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