देश के मुसलमानों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इस्लामिक बैंकिंग की योजना को अमल में लाने की कोशिश की थी. लेकिन अब भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इस पर रोक लगा दी है. रिजर्व बैंक ने कहा कि वह देश में इस्‍लामिक बैंकिंग यानी शरिया बैंकिंग के प्रपोजल को आगे नहीं बढ़ाएगा.

एक RTI के जवाब रिजर्व बैंक ने कहा कि सभी नागरिकों तक बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं पहुंचाने के “व्यापक और समान अवसर” पर विचार करने के बाद ही यह निर्णय लिया गया है.

बैंक ने कहा कि इस्लामिक या शरिया बैंकिंग ब्याज रहित सिद्धांतों पर आधारित एक वित्तीय प्रणाली है, क्योंकि इस्लाम में ब्याज की मनाही है. भारत में इस्लामी बैंकिंग की शुरूआत के मुद्दे पर आरबीआई और भारत सरकार की ओर से जांच की गई.”

ध्यान रहे रिजर्व बैंक ने पिछले साल फरवरी में IDG की रिपोर्ट की कॉपी फाइनेंस मिनिस्ट्री को भेजी थी. इसमें सिफारिश की गई थी कि देश में शरिया बैंकिंग शुरू करने के लिए ट्रेडिशनल बैंकों में एक इस्‍लामिक विंडो शुरू की जाए.

रिजर्व बैंक ने कहा था हमें लगता है कि इस्‍लामिक फाइनेंस, कई नियमों और कई तरह की सुपरवायजरी चुनौतियों, साथ ही इंडियन बैंकों को एक्सपीरिएंस नहीं होने के चलते देश में इस्‍लामिक बैंकिंग धीरे-धीरे शुरू की जानी चाहिए.


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