सऊदी गठबंधन देशों की मांगों को न मानने की वजह से अब क़तर पर सैन्य कारवाई की संभावना बढ़ गई है. ऐसे में क़तर के विदेशमंत्री ने शंका जाहिर की है कि क़तर के विरुद्ध आर्थिक, राजनैतिक और सामाजिक प्रतिबंध, शत्रुतापूर्ण कार्यवाहियां हो सकती है.

विदेशमंत्री शैख़ मुहम्मद बिन अब्दुर्रहमान आले सानी ने कहा कि दोहा कभी भी उसका बहिष्कार करने वाले उन चार देशों की मांगों पर ध्यान नहीं देगा जिन्होंने उसकी संप्रभुता को नुक़सान पहुंचाया है क्योंकि क़तर की संप्रभुता उसकी रेड लाइन है.

उन्होंने सऊदी अरब को निशाना बनाते हुए कहा कि अखंडता और संप्रभुता से संपन्न एक देश का अपमान किया जा रहा है. क़तर सरकार से अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध, मीडिया को बंद करने, विरोधियों को बाहर निकालने की मांग, अंतर्राष्ट्रीय नियमों के ख़िलाफ़ है.

मुस्लिम ब्रदरहुड या इख़वानुल मुसलेमीन को लेकर उन्होंने कहा कि मिस्र इख़वानुल मुसलेमीन को एक आतंकवादी गुट समझता है जबकि इख़वानुल मुसलेमीन एक राजनैतिक गुट है जो बहरैन जैसे देशों में सक्रिय है और बहरैन स्वयं क़तर पर प्रतिबंध लगाने वाले देशों में शामिल है और यह दोहरा मापदंड समझा जाता है.


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