कतर की मानवाधिकार समिति के प्रमुख ने शुक्रवार को कई अरब राज्यों द्वारा अपने देश को अलग करने के लिए उठाये गए कदम की निंदा की है. साथ ही इसे एक सामूहिक सज़ा करार दिया है.

कतर के राष्ट्रीय मानवाधिकार कमिटी के प्रमुख अली बिन सामिख अल-मारी ने संयुक्त राष्ट्रसंघ (UN) से अपील की है कि वह अरब देशों द्वारा की गई नाकाबंदी के कारण होने वाले नुकसान की जांच करे.  उन्होंने कहा कि सऊदी अरब, बहरीन, UAE, मिस्र व अन्य राष्ट्रों द्वारा कतर के साथ कूटनीतिक, आर्थिक व परिवहन रिश्ते खत्म करना और परिवहन के रास्तों को बंद करना बर्लिन दीवार से भी ज्यादा बुरा है.

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अल-मारी ने मांग की है कि UN के मानवाधिकार परिषद को इस नाकेबंदी की निंदा करनी चाहिए. साथ ही, उन्होंने UN से एक जांच दल भेजकर इस नाकेबंदी के कारण कतर पर पड़े नकारात्मक असर का पता लगाने की भी मांग की है.

गौरतलब रहें कि सऊदी व उसके सहयोगी राष्ट्रों ने कतर पर आतंकवादी संगठनों की मदद का आरोप लगाते हुए उसके साथ अपने कूटनीतिक व आर्थिक संबंध तोड़ते हुए अपनी सीमाएं सील कर दी है.

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