कतर ने अरब देशों द्वारा लगाई गई नाकाबंदी से हुए नुकसान की भरपाई के लिए समिति बनाने की घोषणा की है. ये समिति सऊदी अरब, अमीरात, बहरीन और मिस्र द्वारा लगाए गए प्रतिबंध से होने वाले नुकसान की भी गणना करेगी.

कतर के अटॉर्नी जनरल अली बिन फेतेस अल-मैरी ने रविवार को राजधानी दोहा में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा कि मुआवजा दावे की समिति विदेश मंत्रालय और न्याय मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की देखरेख में काम करेगी.

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उन्होंने पत्रकारों से कहा, “यह समिति सभी दावों, यानि सार्वजनिक क्षेत्र, निजी क्षेत्र या अन्य व्यक्तियों से प्राप्त करेगी” उन्होंने कहा, इसमें कतर एयरवेज, बैंक, विदेशों में पढ़ रहे कतर के छात्र जिन्हें इस संकट के बाद निष्कासित कर दिया गया आदि शामिल होंगे.

गौरतलब रहें कि फ़ारस खाड़ी क्षेत्र में अभूतपूर्व संकट 5 जून को सामने आया, जब सऊदी अरब, बहरीन, संयुक्त अरब अमीरात और मिस्र ने आधिकारिक तौर पर दोहा पर “आतंकवाद” का समर्थन करने और मध्य पूर्व को अस्थिर करने का आरोप लगाते हुए कतर के साथ संबंधों को तोड़ दिया था.

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फिर कतर के पर दबाव के लिए, सऊदी अरब ने अपने छोटे पड़ोसी देशों के साथ अपनी जमीनी सीमा को पूरी तरह से बंद कर दिया था जिससे कतर सारी खाद्य आपूर्ति अवरुद्ध हो गई थी. ऐसे में ईरान और तुर्की अब कतर की आवश्यक खाद्य आपूर्ति प्रदान कर रहे हैं .

हालांकि रिश्ते सामान्य करने के लिए 22 जून को तथाकथित घेराबंदी वाले देशों ने कतर को 13-बिंदु की मांगों की सूची दी, जिसमे ईरान से रिश्ते खत्म करना, अलजजीरा का प्रसारण बंद करना, मुस्लिम ब्रदरहुड और हमास की मदद को खत्म करने जैसी मांग शामिल है. जिसे दोहा सरकार ने अवास्तविक, अनुचित और अस्वीकार्य करार देते हुए मानने से इनकार कर दिया.

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