नई दिल्ली : बिना वायदे और किसी नारे के इस राजा ने एक देश को आर्थिक कंगाली से निकालकर , रंक से राजा बना दिया. और ये करिश्मा 60 – 70  साल में नही सिर्फ 10 साल में कर के दिखाया है . मध्य एशिया का छोटा सा देश क़तर 90 के दशक में आर्थिक मंदी से गुजर रहा था लेकिन 2012  आते आते राजा हमद बिन खलीफा ने क़तर को दुनिया का सबसे आमीर देश बना दिया. भारत को सुपरपावर बनाने वाले नताओं को हामिद बिन खलीफा से प्रेरणा लेनी चाहिए.

झूठे वायदे नहीं, कमर तोड़ मेहनत से इस नेता ने एक गरीब मुल्क की पलट दी काया
झूठे वायदे नही, सच्ची सेवा करके क़तर को बनाया वर्ल्ड नंबर वन 
राजा हमद  बिन खलीफा ने यूँ तो अरब के सबसे बड़े  न्यूज़ चैनल अल जज़ीरा की बुनियाद रखी थी  पर खुद अपनी तस्वीरें उसमे नही दिखाई. उन्होंने देश को कोई स्लोगन नही दिया. अपने किंग साइज कट आउट नहीं लगाये. रेडियो और टीवी में अपने इश्तिहार नही दिए. देश से कोई झूठा वादा नही किया. छद्म योजनाओं का एलान नही किया .लेकिन दस सालों के अपने शासन में  हमद  बिन खलीफा अल थानी ने क़तर जैसे छोटे से देश की काया पलट दी.

सबसे पहले गैस रिज़र्व की खोज की , फिर ओद्योगिक शक्ति पर दिया ध्यान 

जानकारों के मुताबिक हमद ने सबसे पहले अपने वैज्ञानिकों के साथ कमर तोड़ मेहनत कर के क़तर में दुनिया के तीसरे सबसे  बड़े गैस रेज़ेर्वे को खोज निकाला. हमद ने फिर क़तर इन्वेस्टमेंट  अथॉरिटी का गठन किया.इस अथॉरिटी ने दुनिया के सबसे मुनाफे वाली कम्पनियों में निवेश करना शुरू किया. क़तर ने अपने  निवेश डिज़्नी से लेकर पोर्शे मोटर कम्पनी और कार्लटन होटल से लेकर लंदन के हररोड स्टोर्स तक में किये और एक बड़ा मुनाफा देश के लिए कमाया. हमद ने क़तर को औद्योगिक शक्ति  बनाने के लिए 2003  में इंडस्ट्रीज क़तर कम्पनी का गठन किया और आज ये सरकारी कम्पनी पेट्रोकेमिकल, फ़र्टिलाइज़र  और स्टील उत्पादन में विश्व की अग्रणी कम्पनियों में से एक है.

2012  में क़तर की प्रति व्यक्ति आय स्विज़टेरलैंड से भी ज्यादा कर दी 

हमद ने 2012  में क़तर को दुनिया का सबसे आमिर देश बना दिया. आंकड़ों के मुताबिक क़तर की प्रति व्यक्ति सालाना आय US  $ 145 ,894 है जो विश्व  में सर्वाधिक है. क़तर ने  स्विट्ज़रलैंड और लुक्सेम्बोर्ग जैसे देशों को अमीरी के  मामले में पीछे छोड़ दिया है और आज भी वो नंबर वन  है. कमाल  ये है कि क़तर को दुनिया का नंबर एक रहीस देश बनाकर हमद ने ६२ साल की उम्र में ही रिटायरमेंट ले लिया और गद्दी अपने  35  साल की बेटे को सौंप  दी. हमद  ने इतनी बड़ी उपलब्धी हासिल करके कभी खुद अपनी बढ़ाई नही की,  बल्कि हमेशा प्रचार और पब्लिसिटी से दूर ही रहे. प्रचार की अंधी दौड़ से गुजर रही  भारतीय राजनिति को आज हमद जैसा राष्ट्र नेता की दरकार है.


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