“अमेरिका से लेकर लंदन और रोम में विरोध प्रदर्शनों में भारत में दलित छात्रों के उत्पीड़न का मुद्दा बना अंतर्राष्ट्रीय चर्चा का विषय”

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हैदराबाद केंद्रीय विश्वविद्यालय में आत्महत्या के लिए मजबूर किए गए दलित छात्र रोहित वेमुला की आत्महत्या के खिलाफ आक्रोश सरहद पार दस्तक देने लगा है। दुनिया के कई देशों में रोहित को न्याय दिलाने और कैंपसों से जातिगत उत्पीड़न को खत्म करने की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन का सिलसिला शुरू हो गया है।

अमेरिका के सैन फ्रांसिसको में इंडियन काउंसिलेट के सामने प्रदर्शन हुआ और इसमें बड़ी संख्या में छात्रों और बुद्धिजीवियों ने शिरकत की। यहां पर प्रदर्शनकारी रोहित की फोटो के साथ-साथ भारत में दलित छात्रों पर हो रहे अत्याचार, भेदभाव से संबधित पोस्टर लेकर आए थे। इन पोस्टरों में हिंदुत्ववादी सोच पर तीखे प्रहार करने वाले नारे भी लिखे थे।

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इसी तरह का एक प्रदर्शन 25 जनवरी को लंदन में भारतीय उच्चायोग के बाहर करने की तैयारी है। लंदन में जातिगत भेदभाव के खिलाफ काम करने वाले कई संगठन कई सालों से सक्रिय हैं। साउथ एशिया सॉलिडेरिटी ने 25 जनवरी को एक मोमबत्ती मार्च का आह्वान किया है। इस संगठन ने  ट्विटर से इस कार्यक्रम की जानकारी दी है और बड़ी संख्या में लोगों से इसमें शिरकत करने की अपील की है। इस कार्यक्रम में लंदन के बाकी मानवाधिकारवादी संगठनों और दलित अधिकार संगठनों जैसे दलित सोलिडेरिटी नेटवर्क आदि के शामिल होने की उम्मीद है।

रोम में भारतीय दूतावास के सामने 27 जनवरी को रोहित की आत्महत्या के खिलाफ शोकसभा बुलाई गई है। इस बैठक में बड़ी संख्या में एशियाई मूल के लोगों के शामिल होने की उम्मीद है। इसी तरह के प्रदर्शन न्यूयॉर्क सहित दुनिया के अलग हिस्सों में करने की तैयारी है। साभार: आउटलुकहिंदी


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