पाकिस्तान में जासूसी के आरोप में सैन्य अदालत से मौत की सजा पाए भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव को जल्द से जल्द फांसी देने की मांग को लेकर शनिवार को सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की गई।

यह याचिका पूर्व सीनेट एडवोकेट फारूक नाईक ने मुजामिल अली की ओर से शनिवार को दायर की गई. जिसमें कहा गया कि  अंतर्राष्‍ट्रीय कोर्ट द्वारा जाधव की फांसी पर लगाया गई रोक पाकिस्‍तान के कानून के लिए बाध्‍यता नहीं है।याचिकाकर्ता के अनुसार, पाकिस्तान अपने घरेलू कानून के आधार पर कार्रवाई करने को स्वतंत्र है।

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याचिका में मांग की गई कि अगर जाधव मामले में सुप्रीम कोर्ट उसकी सजा को उम्रकैद में तब्दील करने में असमर्थ है तो उसे फौरन फांसी दे दी जाना चाहिए। याचिकाकर्ता ने अदालत से यह स्पष्ट करने की अपील की है कि जाधव केस में कानून के मुताबिक कार्रवाई की गई और सभी कानूनी प्रक्रियाओं पर अमल किया गया। याचिकाकर्ता ने यह साफ करने को भी कहा है कि भारत की मांगों के मुताबिक जाधव को वकील की सेवा भी उपलब्ध कराई गई थी।

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याचिका में जाधव की मां का जिक्र करते हुए कहा गया है कि उन्होंने 26 अप्रैल को PPA के सेक्शन 131 और 133 (बी) के अंतर्गत एक अपील दायर की थी। गौरतलब हो कि अंतरराष्‍ट्रीय अदालत ने कुलभूषण जाधव की फांसी पर रोक लगा दी है. जाधव को पाकिस्‍तान की सैन्‍य अदालत ने फांसी की सजा सुनाई है. उसे पाकिस्तान की सरकार की ओर से न तो कोई कानूनी मदद दी जा रही है और न ही उसके बारे में कोई सूचना उसके परिवार को दी जा रही है. जाधव से मिलने भी नहीं दिया जा रहा है.

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