लाहौर | पाकिस्तान में एक शख्स को व्हाट्सअप पर इस्लाम के प्रति अपमानजनक सन्देश भेजने के आरोप में मृत्युदंड की सजा सुनाई गयी है. इसके अलावा उस पर तीन लाख रूपये का जुर्माना भी लगाया गया है. हालाँकि आरोपी के वकील का कहना है की उसके मुवक्किल को झूठे केस में फंसाया जा रहा है. इसलिए हम उच्च न्यायलय में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे. हालाँकि पाकिस्तान में ऐसे बहुत सारे मामलो में आरोपी को मौत की सजा सुनाई जा चुकी है.

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मिली जानकारी के अनुसार पंजाब प्रान्त के सारा-ए-आलमगीर के रहने वाले एक शख्स ने अपने दोस्त को व्हाट्सअप के जरिये एक कविता भेजी थी. बताया जा रहा है की यह कविता इस्लाम का अपमान कर रही थी इसलिए आरोपी के दोस्त ने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज कराई. जैसे ही यह खबर इलाके में फैली तो एक हिंसक भीड़ आरोपी पर हमला करने के लिए उसके घर पहुंची. लेकिन तब तक आरोपी अपने घर से भाग चूका था.

लेकिन कुछ दिन बाद आरोपी ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. बताया जा रहा है की आरोपी अल्पसंख्यक इसाई समुदाय से ताल्लुक रखता है. इस शख्स का नाम नदीम जेम्स मसीह है. मसीह पिछले एक साल से इसी मामले में जेल में बंद है. वही पर मामले की सुनवाई की जा रही है. पुलिस के अनुसार सुरक्षा की वजह से मामले की सुनवाई जेल में ही की जा रही है. अदालत ने जुलाई में मसीह को दोषी करार दिया था.

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फ़िलहाल खबर है की मसीह को अदालत ने मौत की सजा सुनाई है. वही अदालत के एक अधिकारी के अनुसार मसीह पर तीन लाख रूपए का जुर्माना भी लगाया गया है. हालाँकि मसीह के वकील अंजुम का कहना है की मेरा मुवक्किल निर्दोष है. उसको एक मुस्लिम लड़की के साथ प्रेम प्रसंग की वजह से फंसाया जा रहा है. हम इस फैसले के खिलाफ लाहौर के उच्च न्यायलय में अपील करेंगे. बताते चले की पाकिस्तान में अल्पसंख्यको के खिलाफ इस तरह के काफी मामले दर्ज किये गए है.

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