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अपने ही देश में गुलामी की जिंदगी बिताने वाले फिलिस्तीनीयो के सामने हथियारों के दम पर शासन करने वाली इजराइल सरकार झुकती नजर आ रही हैं.

इजराइल के अवैध शासन का विरोध करने के कारण इजराइल की जेलों में बन फिलिस्तीनियों ने भूख हड़ताल कर इसरायली सरकार को अपनी शर्ते मानने के लिए मजबूर कर दिया हैं. फ़िलिस्तीनी क़ैदियों की मांगों के सामने झुकते हुए इस्राईल ने उनकी तीन मांगें स्वीकार कर ली हैं.

मोहम्मद, महमूद और मालिकुल क़ाज़ी नामक फ़िलिस्तीनी क़ैदियों ने ज़ायोनी सैनिकों के हाथों अपनी गिरफ़्तारी का विरोध करते हुए भूख हड़ताल शुरू की थी, अंततः इस्राईल ने उन्हें आज़ाद करने की उनकी मांग स्वीकार कर ली, जिसके बाद उन्होंने 70 दिनों से जारी अपनी भूख हड़ताल समाप्त करने की घोषणा कर दी.

फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को इस्राईली जेलों में बहुत ही दयनीय स्थिति में रखा जाता है और उन्हें हर प्रकार के अधिकारों से वंचित रखा जाता है. फ़िलिस्तीनी क़ैदियों को ज़ायोनी अधिकारी यातनाएं देते हैं और उनपर अत्याचार करते हैं. फ़िलिस्तीनी क़ैदियों के पास इन अत्याचारों का विरोध करने के लिए केवल एकमात्र हथियार भूख हड़ताल है. वे इस दयनीय स्थिति से बाहर निकलने और अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों के विरोध के लिए अपनी जान की बाज़ी दांव पर लगा देते हैं.


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