भारत से पठानकोट हमले की जांच कर रही पाकिस्तानी संयुक्त जांच टीम (जेआईटी) शुक्रवार को वापस जा चुकी है। लेकिन वापसी के एक दिन बाद ने जेआईटी ने हैरान करने वाला दावा किया है।

जेआईटी का कहना है कि भारतीय अधिकारी उन्हें ऐसे सबूत मुहैया कराने में “असफल” रहे हैं, जो यह साबित कर सके कि पाकिस्तान आधारित आतंकवादियों ने वायुसेना बेस पर हमला किया था। गौरतलब है, एक-दो जनवरी की रात पठानकोट वायुसेना बेस पर हुए हमले के बाद 80 घंटे तक गोली बारी होती रही। जिसमें सात जवान शहीद हुए थे। अभी तक चार आतंकवादियों के शव बरामद हुए हैं।

मीडिया में आई रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तानी जांचकर्ताओं को सैन्य बेस में मुख्य द्वार के बजाए एक छोटे रास्ते से अंदर ले जाया गया और उनका दौरा सिर्फ 55 मिनट का था। उतने समय में उस सैन्य स्टेशन में बस थोड़ा सा ही घूमा जा सका और इतने समय में जेआईटी सबूत इकट्ठे नहीं कर सकी। जिओ न्यूज ने जेआईटी के करीबी सूत्रों का हवाला देते हुए कहा यह जानकारी दी है।

जेआईटी सदस्यों ने 29 मार्च को पठानकोट वायुसेना बेस का दौरा किया, जहां राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) के अधिकारियों ने उन्हें सूचनाएं दीं और हमलावर जिस रास्ते से अंदर आए थे वह दिखाया। बताया जा रहा है कि हमले की पूर्व संध्या पर पठानकोट वायुसेना बेस के परिसर के 24 किलोमीटर लंबे क्षेत्र में रोशनी प्रबंध में कमी थी।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि हालांकि, पाकिस्तानी टीम को सिर्फ सीमा सुरक्षा बल और भारतीय बलों की लापरवाही की सूचना दी गयी। भारत के पांच दिन लंबे दौरे के बाद जेआईटी शुक्रवार को वापस लौटी है। इस दौरान हमले से संबंधित साक्ष्य उनके साथ साझा किए गए, जिनमें चार आतंकवादियों के डीएनए रिपोर्ट, उनकी पहचान, जैश-ए-मोहम्मद के आतंकवादियों की संलिप्तता साबित करते वराले फोन कॉल रिकॉर्ड शामिल हैं। (NEWS 24)


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