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अख़लाक़ अहमद उस्मानी

इस साल 16 दिसम्बर को जब क़ज़ाख़स्तान अपनी 25वीं सालगिरह मना रहा होगा, देश को इस बात पर गर्व होगा कि उसने अपनी अर्थव्यवस्था को सोलह गुना बड़ा किया है यानी हर दो साल में दोगुना। आज़ादी के हीरो और देश को स्थायित्व देने वाले नेता नूरसुल्तान नज़रबायेव की सरकार पिछले 25 साल से सत्ता में है और देश लगातार प्रगति कर रहा है। राजधानी अस्ताना शायद दुनिया की सबसे आधुनिक और सुंदर राजधानी है। अगले साल एक्सपो 2017 में देश अन्तरराष्ट्रीय निवेश कार्यक्रम की तैयारी कर रहा है और सैकड़ों देशों के हज़ारों निवेशक और प्रतिनिधि इसमें हिस्सा लेंगे। क़ज़ाख़स्तान भारत का घनिष्ठ मित्र है और अपनी अर्थव्यवस्था में विकास के लिए भारत के सहयोग का इच्छुक है।

आज़ादी के 25 साल पूरे करने के मौक़े पर राजधानी अस्ताना में आयोजित ‘कज़ाख़स्तान की आज़ादी के 25 साल: नतीजे, पूर्णता और भविष्य की योजना’ पर आयोजित एक अन्तरराष्ट्रीय सम्मेलन में सामने आए। कार्यक्रम में क़ज़ाख़स्तान के बारे में उन तथ्यों पर चर्चा की गई जिसके बारे में क़ज़ाख़स्तान के बाहर लोगों को बहुत कम जानकारी है।

मध्य एशिया के हितों का ख़याल है-इदरिसोव

क़ज़ाख़स्तान के विदेश मंत्री इरलान इदरिसोव ने इस कॉन्फ़ेंस में बताया कि देश ने अपनी आज़ादी के साथ ही काफ़ी बाधाओं का सामना किया है लेकिन राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव की बहुआयामी विदेश नीति के बल पर हम आगे बढे। उन्होंने विश्व शांति में क़ज़ाख़स्तान के योगदान का ज़िक्र करते हुए कहाकि किस प्रकार देश ने अपने इन प्रयासों से सम्मान हासिल किया है। उन्होंने देश की उपलब्धियों का ज़िक्र करते हुए कहाकि साल 2010 में ओएससीई और साल 2011-12 में ओआईसी, साल 2015 में विश्व व्यापार संगठन में अध्यक्षता की है। अगले साल क़ज़ाख़स्तान राजधानी अस्ताना में एक्सपो 2017 का आयोजन कर रहा है और पहली जनवरी से संयुक्त राष्ट्र संघ की सुरक्षा परिषद् में अस्थाई सीट प्राप्त करने जा रहा है। यह दर्शाता है कि एक जवान देश पर विश्व कैसे भरोसा कर रहा है।

विदेश मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् में अस्थाई सदस्य के तौर पर देश की प्राथमिकताओं का ज़िक्र किया। इदरिसोव ने कहाकि क़ज़ाख़स्तान अपने वादों की ज़िम्मेदारी लेता है और मध्य एशिया के हितों का प्रतिनिधित्व करता है। हम संयुक्त राष्ट्र में नए संबंध बनाने और पुराने संबंधों को मज़बूत करने पर कार्य करेंगे। इदरिसोव ने क्षे्त्रीय और वैश्विक सुरक्षा को बढ़ाने और मज़बूत करने के लिए अपने प्रभाव और तजुर्बे को इस्तेमाल करने की बात कही। साथ ही दोहराया कि हम दुनिया के ज़िम्मेदार और सरगर्म सदस्य बने रहेंगे।

हमने बीस लाख नौकरियाँ पैदा कीं- निगमातुलिन

क़ज़ाख़स्तान की संसद मजलिस के अध्यक्ष नूरलान निगमातुलिन ने कहाकि 25 सालों में राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव की अध्यक्षता में देश ने सोवियत संघ से अलग होने के बाद बहुत तरक़्क़ी की है। हम सोवियत संघ के कच्चा माल भेजने वाले प्रांत से एक पूर्ण देश की तरफ़ आगे बढ़े हैं। हमारा देश स्थानीय लीडर है, आधुनिक है, मज़बूत अर्थव्यवस्था है और स्थाई समाज है। नूरलान ने नेशनल फंड स्थापित किए जाने का ज़िक्र करते हुए कहाकि इसके बल पर हमने उत्पादक विकास दर, औद्योगिक उत्पादन, बेहतर वेतन ही नहीं बल्कि बीस लाख नौकरियाँ भी पैदा कीं।

भारत के साथ बेहतर संबंध बनाए क़ज़ाख़स्तान- फ़्रेडरिक

अमेरिका की जॉन हॉपकिंस विश्वविद्यालय में मध्य एशिया विभाग के प्रमुख फ्रेडरिक स्टार ने क़ज़ाख़स्तान और भारत के बीच बेहतर दोस्ती की वकालत की। अपने रिसर्च पेपर ‘क़ज़ाख़स्तान 2041- अगले पच्चीस साल’ को प्रस्तुत करते हुए स्टार ने क़ज़ाख़स्तान के भविष्य की चर्चा की। उन्होंने सामाजिक राजनीतिक और सामाजिक आर्थिक स्थितियों का आँकलन पेश करते हुए ज़िक्र किया कि क़ज़ाख़स्तान को क्षेत्रीय मित्रों के साथ संतुलित संबंध रखने होंगे।

हमसे बातचीत में उन्होंने भारत- क़ज़ाख़स्तान के संबंधों के बारे में कहाकि भारत उभरती हुई आर्थिक शक्ति है और दक्षिण एशिया का मज़बूत देश है। उन्होंने भारत के साठवें गणतंत्र दिवस पर क़ज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव को मुख्य अतिथि बनाए जाने को महत्वपूर्ण घटना बताते हुए कहाकि चीन से दोगुनी जनसंख्या दक्षिण एशिया की है। भारत में जवानों की जनसंख्या का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहाकि आने वाले दो दशक तक भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया के देश पूरे यूरेशिया की अर्थव्यवस्था की जान होंगे। स्टार सुझाव देते हैं कि चीन और रूस की अर्थव्यवस्था के बराबर वाले भारत समेत पूरे दक्षिण एशिया पर क़ज़ाख़स्तान को ध्यान देना चाहिए। स्टार लेंडलॉक्ड (समुद्री सीमा के बिना) देश को बाधा नहीं मानते और मानते हैं कि क़ज़ाख़स्तान से एशिया में सड़क मार्ग से कहीं भी पहुँचा जा सकता है। वह भारत और पाकिस्तान और भारत और चीन के बीच सड़क मार्ग से व्यापार का ज़िक्र करते हुए कहते हैं कि मास्को और बीजिंग दूर हो सकते हैं, क़ज़ाख़स्तान नहीं। क़ज़ाख़स्तान के काबुल में व्यापार केंद्र का ज़िक्र करते हुए स्टार कहते हैं कि क़ज़ाख़स्तान मानता है कि अफ़ग़ानिस्तान महत्वपूर्ण क्षेत्र है और भारतीय उपमहाद्वीप तक अपनी पहुँच को व्यापक बनाना चाहता है।

भारत हमारा भाई है- ग़नी क़सीमोव

क़ज़ाख़स्तान संसद की सीनेट के स्पीकर ग़नी क़सीमोव भारत के साथ क़ज़ाख़स्तान के संबंधों को लेकर मानते हैं कि एकदम शुरू में भारत हमें मान्यता देने वाले देशों में हैं। वह भारत जा चुके हैं और वह भारत को क़ज़ाख़स्तान का भाई मानते हैं। हम व्यापार और अर्थव्यवस्था में सहयोग की नीति पर काम कर रहे हैं। हम औद्योगिक, हल्के औद्योगिक, रोज़मर्रा की ज़रूरत की चीज़ें भारत से लेते हैं लेकिन आयात से ज़्यादा महत्वपूर्ण हम भारत से विशेषज्ञता सिखाने में अधिक रूचि रखते हैं। हम व्यापार बढ़ाने पर ज़ोर दे रहे हैं। हम दक्षिण एशिया में भारत के अलावा पाकिस्तान और बांग्लादेश पर ही ध्यान नहीं दे रहे बल्कि अफ़ग़ानिस्तान से हमें क्षेत्रीय पहुँच का फ़ायदा मिलेगा।

भारत हमें दक्षिण एशिया में पहुँच दे सकता है- सुल्तान

क़ज़ाख़स्तान के राष्ट्रपति द्वारा स्थापित विश्व आर्थिक और राजनीतिक संस्थान के निदेशक सुल्तान एकिमबेकोव मानते हैं कि भारत क्षेत्र का सबसे बड़ा देश है और क़ज़ाख़स्तान मध्य एशिया का महत्वपूर्ण देश है। चीन से यूरोप ही नहीं बल्कि दक्षिण से उत्तर जाने के लिए क़ज़ाख़स्तान की हैसीयत ख़ास हो जाती है। सड़क मार्ग के विकास के साथ ही क़ज़ाख़स्तान का विशेष स्थान हो जाता है और भारत हमें दक्षिण एशिया में पहुँच दे सकता है। हमने पिछले 25 सालों में बहुत तरक़्क़ी की है और भारत ने बहुत संघर्ष के साथ आज़ादी हासिल की है। भारत हमें ढाँचागत विकास में सिखा सकता है। इस कॉन्फ्रेंस में क़ज़ाख़स्तान के अलावा रूस, चीन, फ़िनलैंड, ईरान, तुर्की, लातविया, हंगरी, पॉलैंड, स्वीडन, किर्गिज़िस्तान, अमेरिका, जर्मनी, बेलारूस और यूरोपीय यूनियन के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

तरक़्क़ी के २५ साल

आपको बता दें कि क़ज़ाख़स्तान ने सोवियत रूस से 25 साल पहले आज़ाद हुआ था। क़ज़ाख़स्तान में 70 प्रतिशत सुन्नी मुस्लिम रहते हैं और यह पूर्ण रूप से सेकूलर देश है। क़ज़ाख़स्तान ने इन सालों में अपनी अर्थव्यवस्था को 16 गुना बढाया है। क़ज़ाख़स्तान लघु, मध्यम और सूक्ष्म उद्योगों के आधार पर प्रगति करने वाला देश है जिसके तहत 7 लाख छोटे उद्योगों से 25 लाख लोगों को रोज़गार मिलता है और देश की सकल घरेलू उत्पाद में इसका 30 प्रतिशत योगदान है। क़ज़ाख़स्तान के लोग मानते हैं कि इतने कम समय में इतनी प्रगति के पीछे राष्ट्रपति नूरसुल्तान नज़रबायेव की महान् नीतियों ही मुख्य कारण हैं।


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