हमास ने स्पष्ट किया कि क़ुद्स और मस्जिदुल अक़्सा के मुद्दे के सुलझे बिना न तो इस्राईल का अस्तित्व स्वीकार होगा और नहीं इजराइल के साथ किसी भी प्रकार का समझौता होगा.

हमास के पोलित ब्यूरो सदस्य मूसा अबू मर्ज़ूक़ ने अरब देशों और इस्राईल के बीच साठगांठ की कोशिश की ओर इशारा करते हुए कहा कि इलाक़े की स्थिति कितनी ही जटिल हो जाए और क्षेत्र के देश कितना ही समस्याओं में उलझे हों, ज़ायोनियों से सौदा नहीं हो पाएगा.

उन्होंने कहा कि किसी भी हालत में किसी भी बहाने से ज़ायोनियों से संबंध बनाने की अपील क़ुबूल नहीं है.जब तक क़ुद्स और मस्जिदुल अक़्सा का मुद्दा मौजूद है इस्राईल क्षेत्र का हिस्सा नहीं होगा और किसी भी नाम से ज़ायोनियों से समझौता करने की अपील का कोई औचित्य नहीं है.

ग़ौरतलब है कि पश्चिम एशिया में साठगांठ प्रक्रिया 1991 में अमरीका और कुछ योरोपीय देश के इशारे पर शुरु हुयी. यह ऐसी ख़तरनाक प्रक्रिया समझी जाती है जिसका लक्ष्य फ़िलिस्तीनियों के अधिकार को पूरी तरह ख़त्म करना है. अमरीका ने सऊदी अरब के ज़रिए क्षेत्र में दूसरी योजना अरब साठगांठ के नाम से 2002 में पेश की, जिसका लक्ष्य फ़िलिस्तीन के अतिग्रहणकारी इस्राईली शासन को वैधता दिलाना है.


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