म्यांमार के रोहिंगिया मुस्लिम विद्रोहियों ने उत्तरी राखिने राज्य में मानवतावादी संकट को कम करने के लिए एक महीने का एक तरफा युद्धविराम घोषित किया है।

अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (अरसा) ने कहा कि संघर्ष विराम रविवार से शुरू होगा, म्यांमार की सेना को हथियार डालने के लिए भी आग्रह किया जाएगा।

कथित तौर पर अरसा की और से पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद सेना ने राखिने में सैन्य अभियान शुरू किया था. जिसमे 1000 से ज्यादा रोहिंग्या मारे जा चुके है. वहीँ 290,000 पलायन कर चुके है।

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इसी बीच संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सहायता समूहों को म्यांमार सेगने वाले रोहिंग्या की सहायता के लिए तत्काल 77 मीटर (58 मिलियन पाउंड) की जरूरत है।

संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कॉक्स के बाजार में नए आगमन के लिए भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी आवश्यकता है.

बौद्ध-बहुसंख्यक म्यांमार में रोहंगिया के निवासियों का कहना है – सेना और राखिने बौद्ध उनके खिलाफ एक क्रूर अभियान चला रहे हैं. जिनमे उसके गाँवों को जलाया जा रहा है.

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वहीँ म्यांमार ने इसे खारिज करते हुए कहा कि उसकी सेना रोहिंग्या आतंकवादियों के खिलाफ लड़ रही है. हालांकि मरने वाले आम रोहिंग्या है.


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