रोहिंगिया मुस्लिम विद्रोहियों की और से उत्तरी राखिने राज्य में मानवतावादी संकट को कम करने के लिए एक महीने का एक तरफा युद्धविराम घोषित किया गया था. जिसे म्यांमार सरकार ने ठुकरा दिया है.

म्यांमार सरकार ने रोहिंग्या विद्रोहियों से किसी भी बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया है. म्यांमार सरकार ने कहा है कि उनकी आतंकवादियों से बात करने की कोई नीति नहीं है. ध्यान रहे म्यांमार सरकार रोहिंग्या मुस्लिमों को अपना नागरिक नहीं मानती है. साथ ही उन्हें बंगाली आतंकी माना जाता है.

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म्यांमार के राष्ट्रपति कार्यालय के डिप्टी डायरेक्टर जनरल ने जॉव हैटे ने कहा, ‘आतंकवादियों से बात करने की हमारी कोई नीति नहीं है.’ हाल ही में अराकन रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (अरसा) ने संघर्ष विराम की रविवार से शुरू होने की घोषणा की थी. साथ ही म्यांमार सेना को हथियार डालने के लिए भी आग्रह किया था.

कथित तौर पर अरसा की और से पुलिसकर्मियों पर हमले के बाद सेना ने राखिने में सैन्य अभियान शुरू किया था. जिसमे 1000 से ज्यादा रोहिंग्या मारे जा चुके है. वहीँ 290,000 पलायन कर चुके है.

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संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि सहायता समूहों को म्यांमार सेगने वाले रोहिंग्या की सहायता के लिए तत्काल 77 मीटर (58 मिलियन पाउंड) की जरूरत है. संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि कॉक्स के बाजार में नए आगमन के लिए भोजन, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं की एक बड़ी आवश्यकता है.

बौद्ध-बहुसंख्यक म्यांमार में रोहंगिया के निवासियों का कहना है – सेना और राखिने बौद्ध उनके खिलाफ एक क्रूर अभियान चला रहे हैं. जिनमे उसके गाँवों को जलाया जा रहा है.

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